31 C
Lucknow
Monday, April 27, 2026

भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता -‘0% टैरिफ’, वीजा और 20 अरब डॉलर निवेश से खुलेगा नए अवसरों का रास्ता

Must read

 

नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से देश के निर्यात, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। इस समझौते के तहत कई प्रमुख भारतीय उत्पादों पर न्यूजीलैंड में लगने वाला 5 से 10 प्रतिशत तक का आयात शुल्क खत्म होकर शून्य हो जाएगा, जिससे भारतीय सामान वहां के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और चीन जैसे देशों को सीधी टक्कर मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूजीलैंड हर साल चीन से 10 अरब डॉलर से अधिक का आयात करता है, जहां पहले से ही जीरो टैरिफ की सुविधा है। ऐसे में भारत को अब समान अवसर मिलने से निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। टेक्सटाइल, लेदर गुड्स, फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा और केमिकल्स जैसे सेक्टर को इस समझौते से सीधा लाभ मिलने वाला है।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते से देश के कई राज्यों को भी बड़ा फायदा होगा। जम्मू-कश्मीर के पश्मीना शॉल, केसर और हैंडीक्राफ्ट, हिमाचल और पंजाब के बासमती चावल व स्पोर्ट्स गुड्स, उत्तर प्रदेश के लेदर व फुटवियर और प्रोसेस्ड फूड, उत्तराखंड के हैंडलूम और टेक्सटाइल उत्पादों के निर्यात को नया बाजार मिलेगा। इसके अलावा गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों के उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार का अवसर मिलेगा।
इस समझौते का एक अहम पहलू निवेश और तकनीकी सहयोग भी है। न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा, जिससे उद्योगों को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं, कोकिंग कोल, लकड़ी और स्क्रैप जैसे कच्चे माल पर शुल्क हटने से भारतीय उद्योगों को सस्ता संसाधन उपलब्ध होगा, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी।
कृषि क्षेत्र में भी यह समझौता अहम साबित हो सकता है। न्यूजीलैंड की उन्नत तकनीक के सहयोग से भारत में सेब, किवी और मनुका शहद के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में जहां भारत में सेब और किवी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम है, वहीं न्यूजीलैंड की तकनीक से इसमें कई गुना वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, घरेलू किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आयात पर न्यूनतम मूल्य की शर्त भी तय की गई है।
युवा वर्ग के लिए भी यह समझौता नए दरवाजे खोलता नजर आ रहा है। इसके तहत न्यूजीलैंड हर साल संगीत, योग और पाक कला जैसे क्षेत्रों से जुड़े 1000 भारतीय युवाओं को एक साल का वीजा देगा, जिससे वे वहां काम करने के साथ अनुभव भी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा आईटी, हेल्थ, शिक्षा और टूरिज्म सेक्टर के प्रोफेशनल्स के लिए हर साल 5000 वीजा का अलग कोटा निर्धारित किया गया है। पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों को भी सप्ताह में 20 घंटे काम करने की अनुमति दी जाएगी, जबकि उच्च शिक्षा के बाद 2 से 3 साल तक वर्क वीजा मिल सकेगा।
कुल मिलाकर, भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो निर्यात को नई ऊंचाई देने, निवेश आकर्षित करने और युवाओं के लिए वैश्विक अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article