फर्रुखाबाद। जिले से होकर गुजरने वाले प्रमुख हाईवे मार्गों पर यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। सड़क सुरक्षा को लेकर जहां एक ओर ट्रैफिक पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर भारी वाहन चालक, खासकर प्राइवेट बस संचालक, नियमों को ताक पर रखकर मनमानी करते नजर आ रहे हैं।
सबसे अधिक खतरनाक स्थिति इटावा-बरेली हाईवे पर देखने को मिल रही है, जहां आए दिन बसें और अन्य भारी वाहन गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में दौड़ते दिखाई देते हैं। यह न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान को भी सीधा खतरे में डालता है।
यातायात नियमों के अनुसार भारत में वाहनों को सड़क के बाईं ओर चलना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कई स्थानों पर बस चालक समय बचाने या यू-टर्न से बचने के लिए सीधे गलत दिशा में ही वाहन दौड़ा देते हैं। इससे अचानक सामने से वाहन आने पर टकराव की स्थिति बन जाती है, जो अक्सर गंभीर हादसों में बदल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गलत साइड में वाहन चलाना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है। तेज रफ्तार और लापरवाही के साथ जब यह प्रवृत्ति जुड़ जाती है, तो हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से खड़े वाहन और गलत दिशा में आ रहे वाहन ट्रैफिक के सामान्य प्रवाह को भी बाधित करते हैं, जिससे जाम की समस्या और बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाईवे पर यह समस्या अब आम हो चुकी है। बाइक सवार और छोटे वाहन चालक अक्सर अचानक सामने से आ रहे भारी वाहनों को देखकर घबरा जाते हैं, जिससे उनका संतुलन बिगड़ जाता है और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। कई बार ऐसे मामलों में जानलेवा हादसे भी सामने आ चुके हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हाईवे पर सख्त निगरानी रखी जाए और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। नियमित चेकिंग अभियान, सीसीटीवी निगरानी और भारी जुर्माने जैसी सख्त व्यवस्थाएं ही इस समस्या पर लगाम लगा सकती हैं।
साथ ही यह भी जरूरी है कि वाहन चालक स्वयं जिम्मेदारी समझें। यातायात नियमों का पालन केवल कानून का डर नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा का सवाल है। थोड़ी सी लापरवाही किसी की जिंदगी छीन सकती है।


