वॉशिंगटन
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने प्रस्तावित समझौते की शर्तों को स्वीकार नहीं किया, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचे, पावर प्लांट और प्रमुख पुलों को पूरी तरह नष्ट कर देगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और अस्थिरता का माहौल और गहरा गया है।
ट्रंप ने ईरान पर मौजूदा संघर्ष विराम (सीजफायर) का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान ने गोलीबारी की, जिसमें फ्रांस और ब्रिटेन के जहाजों को निशाना बनाया गया। ट्रंप के अनुसार यह कदम ईरान की “हताशा” को दर्शाता है और क्षेत्र में शांति के प्रयासों को कमजोर करता है।
हालांकि कड़े तेवर के बीच ट्रंप ने कूटनीति का विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधियों का एक दल इस्लामाबाद में ईरान के साथ निर्णायक वार्ता के लिए पहुंचने वाला है। ट्रंप ने इसे ईरान के लिए “आखिरी मौका” बताया है, जहां उसे या तो समझौता करना होगा या गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका उनकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक किसी भी बातचीत का कोई मतलब नहीं है। इससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।
ट्रंप ने ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी पर भी तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी पहले ही ईरान को भारी नुकसान पहुंचा रही है। उनके मुताबिक, इस प्रतिबंध के चलते ईरान को प्रतिदिन करीब 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है, जबकि वैश्विक जहाज अब अमेरिका के बंदरगाहों का रुख कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका की संयुक्त एयर स्ट्राइक के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया। 8 अप्रैल को अस्थायी संघर्ष विराम लागू किया गया था, लेकिन उसके बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके। अब ट्रंप की सख्त चेतावनी और ईरान के कड़े रुख के चलते पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं।


