लखनऊ/हरदोई। प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 29 अप्रैल को हरदोई जनपद से देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे। यह परियोजना न केवल प्रदेश की यातायात व्यवस्था को नई गति देगी, बल्कि पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक कनेक्टिविटी को भी मजबूती प्रदान करेगी।
करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक फैला हुआ है, जो उत्तर प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों को आपस में जोड़ता है। इसके निर्माण से राज्य के दूर-दराज क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी और लोगों को तेज, सुरक्षित व आधुनिक सड़क सुविधा उपलब्ध होगी। विशेष रूप से व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में यह परियोजना गेमचेंजर साबित होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2020 में स्वीकृति मिलने के बाद रिकॉर्ड समय में निर्माण कार्य को गति दी गई, जो अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह एक्सप्रेसवे ‘नए उत्तर प्रदेश’ के विजन का प्रतीक माना जा रहा है, जहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए विकास को नई दिशा दी जा रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से धार्मिक पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलेगा। प्रयागराज, वाराणसी और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी। साथ ही, प्रदेश में निवेश के नए अवसर खुलेंगे और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में अग्रणी भूमिका निभाएगा और इसकी हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण प्रदेश के विकास की रफ्तार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।


