नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर इन दिनों राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadda) को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता दिख रहा है। पार्टी की ओर से उन पर भारतीय जनता पार्टी से कथित मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, कभी पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद और प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले राघव चड्ढा को लेकर अब शीर्ष नेतृत्व सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। पार्टी की ओर से उन्हें “एहसान फरामोश” तक कहा गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने उन्हें एक सामान्य परिवार से उठाकर संसद तक पहुंचाया, लेकिन अब उन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालिया घटनाक्रम में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया था, जिसके बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। सूत्रों के अनुसार, यह चर्चा पहले से ही चल रही थी कि अरविंद केजरीवाल से जुड़े कथित शराब घोटाले मामले और पार्टी की रणनीति पर राघव चड्ढा की भूमिका अपेक्षाकृत कम सक्रिय रही है। बताया जा रहा है कि जब उस मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, उस दौरान भी राघव चड्ढा पार्टी के अन्य नेताओं की तरह केंद्र सरकार पर उतने आक्रामक रूप से नहीं दिखे थे। वहीं, फरवरी के अंत में जब अदालत की ओर से केजरीवाल को राहत मिली, तब भी उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रिया सीमित रही, जिसे लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं हैं।
घटनाक्रम तब और गंभीर हो गया जब राघव चड्ढा की जगह डिप्टी लीडर बनाए गए अशोक कुमार मित्तल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी हुई। इसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया। आम आदमी पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राघव चड्ढा की भूमिका हो सकती है। पार्टी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि राघव चड्ढा की भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात हुई थी और उन्होंने ही कथित तौर पर अशोक कुमार मित्तल के खिलाफ ईडी कार्रवाई की मांग की।
पार्टी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने मीडिया से बातचीत में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल और पार्टी ने एक सामान्य परिवार से आए कार्यकर्ता को आगे बढ़ाकर संसद तक पहुंचाया, लेकिन अब उनके व्यवहार से पार्टी को निराशा हुई है। प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि राघव चड्ढा की भूमिका को लेकर पार्टी में गंभीर असंतोष है और इसे “कृतघ्नता” और “विश्वासघात” जैसी बातों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व के प्रति उनका रवैया अपेक्षित सहयोगात्मक नहीं रहा।
राघव चड्ढा के बीच जारी विवाद में फिलहाल नया मोड़ यह है कि ताजा राजनीतिक हमलों के बाद भी राघव चड्ढा ने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और वे इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। इससे पहले जब उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाया गया था, तब उन्होंने सवाल उठाए थे कि उनकी गलती क्या थी। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या आम लोगों की आवाज उठाने की वजह से उन्हें पद से हटाया गया और सदन में उनके बोलने के अधिकार को सीमित किया गया। पार्टी की ओर से उन पर लगातार तीखे आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर राघव चड्ढा की चुप्पी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।


