तमिलनाडु में इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतर चुके हैं और मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चेन्नई में अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन, वरिष्ठ नेता के. अन्नामलाई और तमिलिसाई सुंदरराजन मौजूद रहे।
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में राज्य के विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई वादे किए हैं। पार्टी ने दावा किया कि उसका विजन तमिलनाडु को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से और मजबूत बनाना है। इस दौरान नेताओं ने जनता के बीच अपनी योजनाओं को रखते हुए राज्य में बदलाव का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने तमिलनाडु की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया और कहा कि यह राज्य दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को तमिलनाडु की परंपराओं और गौरव पर गर्व है, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह पहचान कमजोर पड़ती जा रही है।
नड्डा ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध बढ़ रहे हैं और शासन व्यवस्था कमजोर हो गई है। उनके अनुसार, डीएमके सरकार कई मोर्चों पर विफल रही है और जनता अब इसका जवाब आगामी चुनाव में देगी।
इसके साथ ही उन्होंने डीएमके को परिवारवादी पार्टी करार देते हुए कहा कि सत्ता कुछ ही लोगों के हाथों में केंद्रित है। उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन, कनिमोझी और अन्य नेताओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर हो गया है और निर्णय सीमित दायरे में लिए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु का यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है, जहां भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं डीएमके अपने कामकाज के आधार पर जनता का समर्थन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में चुनावी प्रचार और बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, जिससे राज्य की सियासत और अधिक गरमाती दिखेगी।


