– जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर अकेले मैदान मे
– प्रशासन मुस्तैद, व्यवस्था सुचारु की क़वायद हुईं शुरू
फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन के अनुसार जनपद के 33 गांव, 23,367 लोग और 4,855 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि गंगा का जलस्तर 136.90 मीटर पहुंचकर चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से ऊपर बह रहा है।
प्रशासन ने 24 अस्थायी शरणालय, 52 बाढ़ चौकियां, 50 नावें, 5 मोटरबोट, एनडीआरएफ की एक टीम और पीएसी फ्लड यूनिट तैनात होने का दावा किया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि व्यवस्था इतनी व्यापक है, तो अब तक 240 लोग ही शरणालयों तक क्यों पहुंचे, जबकि प्रभावित आबादी 23 हजार से अधिक बताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने 35 मेडिकल कैंप लगाकर 536 लोगों के उपचार, 272 ओआरएस पैकेट और 896 क्लोरीन टैबलेट बांटने का दावा किया है। वहीं पशुपालन विभाग ने 11 पशु चिकित्सा शिविरों में 79 पशुओं के उपचार और 3,804 पशुओं के टीकाकरण की जानकारी दी है।
हालांकि प्रभावित गांवों के लोगों की सबसे बड़ी चिंता अब भी सुरक्षित आवागमन, फसलों की बर्बादी, पशुओं के चारे, स्वच्छ पेयजल और आजीविका की है। ऐसे में केवल आंकड़े जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि राहत सामग्री का प्रभावी वितरण और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर सहायता पहुंचाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
अब नजर इस बात पर है कि बाढ़ का पानी उतरने तक राहत कार्य केवल सरकारी दावों तक सीमित रहते हैं या वास्तव में हर प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचती है।
33 गांव प्रभावित, हजारों लोग संकट में; राहत के आंकड़ों से जमीनी हकीकत बदलने की तैयारी


