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Sunday, June 21, 2026

सदर विधानसभा में बदल रहे चुनावी समीकरण, विजय सिंह और अनुपम दुबे फैक्टर बन सकते हैं निर्णायक

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फर्रुखाबाद। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सदर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद सामने आए आंकड़ों ने चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार चुनाव केवल दलों के बीच नहीं, बल्कि प्रभावशाली स्थानीय चेहरों और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द भी घूमेगा।

जानकारों के अनुसार सदर विधानसभा क्षेत्र में करीब 90 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कम हुए हैं, जिनमें सर्वाधिक संख्या गंगा पार क्षेत्र के मतदाताओं की बताई जा रही है। गंगा पार का इलाका वर्षों से चुनावी परिणामों को प्रभावित करता रहा है। ऐसे में मतदाताओं की संख्या में आई इस बड़ी कमी ने सभी दलों की रणनीतियों को प्रभावित कर दिया है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदले हुए परिदृश्य में पूर्व विधायक विजय सिंह फैक्टर एक बार फिर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वर्तमान में जेल में निरुद्ध होने के बावजूद सदर क्षेत्र में उनका प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा। क्षत्रिय समाज, स्वर्णकार समाज तथा विभिन्न छोटे और फुटकर मतदाता समूहों में उनकी पकड़ आज भी चर्चा का विषय है। समर्थकों का एक बड़ा वर्ग अब भी उनकी सक्रिय राजनीति में वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।

 

वहीं दूसरी ओर अनुपम दुबे फैक्टर भी भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिले के एक बड़े वर्ग, विशेषकर ब्राह्मण समाज के कुछ मतदाता वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि अनुपम दुबे से जुड़े सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को नजरअंदाज करना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

 

विश्लेषकों का कहना है कि सदर विधानसभा में ब्राह्मण मतदाता हमेशा से प्रभावी भूमिका निभाते रहे हैं। यदि इस वर्ग में नाराजगी का माहौल बना रहता है तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर विजय सिंह समर्थक वोट बैंक और अनुपम दुबे से जुड़े प्रभाव क्षेत्र मिलकर चुनावी मुकाबले को और रोचक बना सकते हैं।

 

हालांकि अभी किसी भी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि सदर विधानसभा में इस बार केवल पार्टी का चुनाव चिन्ह ही नहीं, बल्कि स्थानीय प्रभाव, सामाजिक समीकरण और व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ भी जीत-हार तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। ऐसे में विजय सिंह फैक्टर और अनुपम दुबे फैक्टर दोनों पर सभी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।

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