कूर्मि सौरभ कटियार
रिश्तों की दुनिया बड़ी अजीब है। कुछ रिश्ते हमारे अपने होते हैं, लेकिन वक्त की जरूरत पड़ने पर हमारे साथ खड़े नहीं होते और कुछ ऐसे होते हैं, जिनसे हमारा कोई खून का रिश्ता नहीं होता, फिर भी वे जिंदगी के हर मोड़ पर हमारा हाथ थामे खड़े रहते हैं। समाज उन्हें शायद पराया कहता है, लेकिन उनके त्याग, समर्पण और अपनापन उन्हें किसी भी रिश्ते से ज्यादा अपना बना देता है।
जिंदगी में कभी-कभी कोई ऐसा व्यक्ति आता है जो हमारे सुख-दुख को अपना समझ लेता है। हम परेशान होते हैं तो उसकी रातों की नींद उड़ जाती है। हम दुखी होते हैं तो उसके चेहरे की मुस्कान गायब हो जाती है। हम खुश होते हैं तो हमारी खुशी में उससे ज्यादा खुश होने वाला कोई नहीं होता। वह हमारे लिए सिर्फ अपना समय नहीं देता, बल्कि कई बार अपनी इच्छाओं, अपने सपनों और अपनी खुशियों तक को पीछे छोड़ देता है।
किसी पराये इंसान की खुशी के लिए अपनी खुशी छोड़ देना आसान नहीं होता। इसके पीछे बहुत बड़ा त्याग छिपा होता है। वह व्यक्ति शायद कभी यह नहीं बताता कि उसने हमारे लिए क्या-क्या छोड़ा। वह अपनी परेशानियां छिपा लेता है, अपनी जरूरतें दबा लेता है और हमारी जरूरत को अपनी जरूरत से ऊपर रखता है। वह इसलिए नहीं करता कि उसे बदले में कुछ मिलेगा, बल्कि इसलिए करता है क्योंकि उसके लिए हमारा सुख ही उसकी खुशी बन चुका होता है।
लेकिन विडंबना यह है कि हम अक्सर ऐसे इंसान की कीमत उसके रहते नहीं समझ पाते। हमें उसकी मौजूदगी की आदत हो जाती है। हमें लगता है कि वह हमेशा रहेगा, हमेशा हमारा इंतजार करेगा, हमेशा हमारी व्यस्तता को समझेगा और हमारी बेरुखी को भी सह लेगा। हम यह भूल जाते हैं कि सामने वाला भी इंसान है। उसके पास भी भावनाएं हैं, उसकी भी इच्छाएं हैं, उसके भी सपने हैं और उसे भी कभी-कभी हमारे समय और हमारे साथ और हमारे सम्मान की जरूरत होती है।
किसी रिश्ते में सबसे बड़ी चोट हमारा धोखा नहीं देता। कई बार उपेक्षा उससे ज्यादा गहरी चोट करती है। जिस व्यक्ति ने हमारे लिए घंटों इंतजार किया हो, अगर हम उसके लिए कुछ पल भी न निकाल पाएं तो उसके मन में पैदा होने वाला खालीपन शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जिस व्यक्ति ने हमारी हर छोटी-बड़ी परेशानी सुनी हो, अगर हम कभी उसकी परेशानी पूछने का समय तक न निकालें, और उसकी कमियां ढूंढ उसका रोज अपमान करें, उसे तड़पा तड़पा कर मारने का प्रयास करें तो उसके लिए इससे बड़ा अकेलापन और क्या होगा।
हम अक्सर कहते हैं कि जिंदगी बहुत व्यस्त है। काम बहुत है, जिम्मेदारियां बहुत हैं, समय कम है। लेकिन सच यह है कि समय किसी के पास अतिरिक्त नहीं होता। समय निकाला जाता है। जिन लोगों को हम महत्व देते हैं, उनके लिए हम अपनी व्यस्त जिंदगी में भी कुछ पल निकाल लेते हैं। इसलिए कई बार किसी को समय न दे पाना समय की कमी नहीं, बल्कि उसकी प्राथमिकता कम हो जाने का संकेत होता है। और यह बात उस इंसान को सबसे ज्यादा दुख देती है, जिसने कभी हमें अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा था।
रिश्ते सिर्फ प्रेम से नहीं चलते। उन्हें सम्मान की भी जरूरत होती है। कोई व्यक्ति आपके लिए कितना ही समर्पित क्यों न हो, उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी भावनाओं की आपके जीवन में कोई कीमत है। उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसका त्याग देखा गया है, उसकी चिंता समझी गई है और उसकी मौजूदगी को सिर्फ एक सुविधा की तरह नहीं लिया जा रहा।
कई बार हम सामने वाले की खामोशी को उसकी सहमति समझ लेते हैं। वह शिकायत नहीं करता तो हमें लगता है कि उसे कोई परेशानी नहीं। वह सवाल नहीं करता तो हमें लगता है कि वह सब समझता है। वह बार-बार माफ कर देता है तो हमें लगता है कि वह हमेशा माफ करता रहेगा। लेकिन हर खामोशी के पीछे सहमति नहीं होती। कभी-कभी खामोशी उस थकान का नाम होती है, जहां इंसान शिकायत करते-करते थक चुका होता है।
जिस दिन शिकायत खत्म हो जाए, उस दिन रिश्ते को लेकर चिंतित नहीं बल्कि निश्चिन्त हो जाओ क्योंकि शिकायत करने वाला व्यक्ति अब जिन्दा होते हुए भी मर चुका है। वह चाहता था कि सामने वाला उसका अपना उसे समझे, उसकी बात सुने और उसके साथ रहे। लेकिन तब देर हो चुकी होती शिकायत भी खत्म हो जाती है, सवाल भी खत्म हो जाते हैं और इंतजार भी खत्म हो जाता है, क्योंकि बह इंसान उस इंसान के लिये मर चुका होता है भीतर से बहुत दूर जा चुका होता है।
रिश्ते अक्सर किसी एक बड़ी गलती से नहीं टूटते। वे छोटी-छोटी उपेक्षाओं से धीरे-धीरे कमजोर होते हैं। फोन का जवाब न देना, मिलने के ल…


