फोर्स का टूट गया मनोवल, कमजोर हो गईं पुलिस टीम, माफिया ले रहे एफिडेविड, भयजदा वादी गवाह नही देने जाते गवाही
करीब आधा दर्जन से ज्यादा तेज तर्रार पुलिस इंस्पेक्टर साल भर से वैडइंट्री के शिकार
जिले में ४५ इंस्पेक्टर फिर भी १५ दिन से खाली एसओजी प्रभारी का पद
छोटे थानों में कई इंस्पेक्टर तैनात, कुछ में तो पांच की तैनात
यूथ इंडिया। फर्रूखाबाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सत्ता को चार चांद लगाने वाली माफिया और अपराध के विरूद्व उनकी अपनी नीति जीरो टॉलरेंस के जिले में पूरी तरह पैर उखड चुके है। हावी हो चुके माफिया तंत्र के कारण वादी और गवाह होस्टाइल हो रहे, हाईकोर्ट में शपथपत्र दे रहे कारण सिर्फ इतना है कि माफिया पर सितम ढहाने वाली पुलिस टीमें खुद अपनी ही जांच कराने में जुटी। जिले में तैनात आघा दर्जन से ज्यादा इंस्पेक्टर वैडइंट्री का शिकार हेाकर खुद अकेले संघर्ष करते दिख रहे। जिसके चलते फोर्स के टूटे मनोवल के बीच कमजोर हुई पुलिस टीमों को देख माफिया न केवल खुलेआम घूम रहा बल्कि अधिकारियों और जिम्मेदारों के खिलाफ ही शिकायतों के पुलिंदे भर-भर भेज रहा। इतना ही नही उनके विरूद्व उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक नही दो नही करीब तीन-तीन दर्जन रिट याचिकाएं दाखिल हों रहीं। छोटी सी पगार वाले पुलिस कर्मी अब मंहगे वकीलों को मेहनताना दे या साहब बहादुर को सफाईनामा दें।
जनपद में माफिया अनुपम दुबे के खिलाफ हुई तमाम कार्यवाही कुर्की, संपत्तियों के जब्तीकरण और ठंडी सडक़ स्थित होटल गुरू शरणम जैसे करोडों के वेशकीमती अवैध होटल के ध्वस्तीकरण का काम इंस्पेक्टर आमोद कुमार सिंह के नेतृत्व में हुआ। इंस्पेक्टर अमित कुमार गंगवार ने माफिया संजीव पारिया, गैगस्टर अमित दुबे डब्बन जैसे भारी भरकम दुर्दांत अपराधियों को गिरफ्तार कर न केवल सलाखों के पीछे पहुंचाया बल्कि उन्हें पूरी तरह वेनकाब किया। माफिया के साथी अवधेश मिश्रज्ञ के विरूद्व इंस्पेक्टर रणविजय सिंह ने मुकदमा पंजीकृत किया वह आज वैडइंट्री पाकर खुद संघर्ष करते जूझ रहे। इसी क्रम में एसपी के रीडर गोविन्द वर्मा, योगेन्द्र सोलंकी, भोलेन्द्र चतुर्वेदी, अवध नारायण जैसे इंस्पेक्टर अपनी ही जांच कराते बेकार बैठै। कुछ चार्ज लायक भी है तो वह नेतागीरी और जातीय कारणों की बजह से ठंडे बस्ते में है। कमजोर हुई पुलिस और टूटे पुलिसिया इकवाल के बीच माफिया के खिलाफ वादी इकलब्य कुमार, सतेन्द्र कश्यप जैसे कई पीडि़त अपनी जान बचाते खुद धूम रहे। पुलिस का हाल देख उनका मनोवल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका। महीनों से फरार गैगस्टर योगेन्द्र सिंह यादव चन्नू के समर्थन में हाई कोर्ट में वादी होस्टाइल होकर शपथपत्र दे रहे।
१४ थानों वाले जिले में चार दर्जन इंस्पेक्टर होने के बाद भी एक पखबारे से स्पेशन ऑपरेशन गु्रप यानि एसओजी भंग है, तैनाती को प्रभारी ढूंढे नही मिल रहा। जिन माफिया के खिलाफ जावांज पुलिस कर्मियों ने ताबडतोड कार्यवाहियां की आज उनके खिलाफ झूठी शिकायतें हों रहीं। उनके विरूद्व न्यायालयों में मुकदमें डाले जा रहे तो आखिर कौन करेगा माफिया के खिलाफ काम और कौन करेगा मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस की वकालत, जिले में पुलिस और प्रशासन के हिमायती अब दुश्मनों की तरह देखते जाते अब न यहां राम राज्य का अहसास है और न सीएम योगी के सुशासन की आहट यहां सिर्फ माफिया तंत्र हावी है और उससे लडने वाले वैकफुट और लाचारी के सम्वाहक।
माफिया के साथी ने आठ माह में घुटनों भर की पुलिस
प्रशासन से लेकर शासन तक ब्लैकमेंलिग, दाखिल की ३० याचिकाएं
अक्टूवर २०२५ में पुलिस की गिरफ्त से फरार हुए करीब दस आपराधिक मुकदमों के आरोपी अभियुक्त और माफिया अनुपम दुबे व संजीव पारिया के सबसे खास साथी अवधेश मिश्रा ने बीते आठ माह में जिले की खाकी को खुला चैलेंज कर अकेले दम पर खाकी को घुटनों भर कर लिया। खुद पर कार्यवाही न हो इसके लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अब तक तीस याचिकाएं दाखिल कर जिले से लेकर शासन तक के अधिकारियों को घसीट लिया। तमाम पुलिस कर्मियों की झूठी शिकायतें कर नाक में दम कर दी और लाचार प्रशासन आज भी उसके प्रार्थना पत्रों पर जांचे करने को मजबूर है।


