फर्रुखाबाद। 13 जनवरी मंगलवार को सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, श्यामनगर फर्रुखाबाद में स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में श्रद्धा, उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति और युवा चेतना से सराबोर दिखाई दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुशील (नगर संघचालक, फर्रुखाबाद नगर), विशिष्ट अतिथि आयुष (जिला विद्यार्थी कार्य प्रमुख, भीष्मनगर फर्रुखाबाद), मुख्य वक्ता डॉ. आलोक बिहारी (विभागाध्यक्ष, हिंदी, भारतीय महाविद्यालय), प्रधानाचार्य रामकृष्ण बाजपेई एवं श्रीनारायण मिश्र द्वारा स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

कार्यक्रम के संयोजक चंदन लाल मिश्र ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए नरेंद्र दत्त से स्वामी विवेकानंद बनने तक की प्रेरणादायी यात्रा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर स्वामी विवेकानंद ने विश्व मंच पर भारत की आध्यात्मिक पहचान स्थापित की।

मुख्य वक्ता डॉ. आलोक बिहारी ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के जीवन की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से उनके आदर्शों—आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और सेवा-भाव—को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन साहस, त्याग और सेवा का जीवंत उदाहरण है। उनका अमर संदेश “उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको” आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

वक्ताओं ने शिकागो धर्मसभा में दिए गए ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भाषण भारतीय संस्कृति और मानवता की विश्वव्यापी घोषणा था। स्वामी विवेकानंद का युवा-दर्शन स्पष्ट करता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करना है। उन्होंने युवाओं से मोबाइल और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने तथा समय का सदुपयोग करने की अपील की।

कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में प्रधानाचार्य रामकृष्ण बाजपेई ने आए हुए अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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