कानपुर। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब देश के औद्योगिक शहर कानपुर तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते यहां के उद्योग, खासकर मेटल और संबंधित उत्पादन इकाइयां, बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। स्थिति यह है कि कई फैक्ट्रियों में मशीनें ठप पड़ी हैं और उत्पादन क्षमता आधी रह गई है।
उद्यमियों के अनुसार, युद्ध जैसे हालात के कारण कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे मेटल आधारित उद्योगों में काम लगभग रुक गया है। कई इकाइयों में मशीनें बंद हैं और ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
श्रमिकों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। जहां पहले पूरी क्षमता के साथ काम होता था, वहां अब केवल 30 से 50 प्रतिशत मजदूर ही कार्यरत रह गए हैं। काम की कमी के चलते कई श्रमिकों को अस्थायी रूप से हटाना पड़ा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
इसके अलावा, कॉमर्शियल गैस की कमी ने भी उद्योगों की कमर तोड़ दी है। उद्यमियों का कहना है कि गैस की उपलब्धता बाधित होने से उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे लागत बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है।
औद्योगिक संगठनों का दावा है कि वर्तमान परिस्थितियों में कानपुर की फैक्ट्रियों में लगभग 50 प्रतिशत तक काम प्रभावित हुआ है। यदि जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए, तो इसका असर बड़े पैमाने पर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
उद्यमियों ने सरकार से मांग की है कि कच्चे माल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, साथ ही उद्योगों को राहत पैकेज दिया जाए ताकि इस संकट से उबरने में मदद मिल सके।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर कानपुर उद्योगों पर, फैक्ट्रियों में आधा काम ठप


