नई दिल्ली
मध्य-पूर्व में मिडिल ईस्ट का युद्ध अब और अधिक भयावह होता जा रहा है। ईरान , इजराइल और यूनाइटेड स्टेट के बीच जारी संघर्ष 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ताजा घटनाक्रम में कुवैत और बहरीन पर हमले हुए हैं, जबकि कतर के पास एक तेल टैंकर के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई है।
इजरायली सेना ने बताया कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया, जिससे मध्य इजरायल के कई इलाकों में सायरन बज उठे। इसके तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल ने ईरान की राजधानी Tehran में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे कई इलाकों में जोरदार धमाके हुए।
इजरायल ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के सेंट्रल कमांड के साथ मिलकर अब तक 4,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। इन अभियानों के तहत 800 से ज्यादा हवाई हमले किए गए और हजारों टन गोला-बारूद का इस्तेमाल हुआ। वहीं, लेबनान में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के जरिए इजरायल के एक सैन्य ड्रोन को मार गिराया गया, जिससे संघर्ष का दायरा और फैलता नजर आ रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कई सैन्य अभियानों को अंजाम देने का दावा किया है। साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेता ने हिज्बुल्ला को समर्थन जारी रखने की बात कही है, जिससे क्षेत्र में प्रॉक्सी वॉर और तेज होने की आशंका है।
बहरीन में एक कंपनी में आग लगने की घटना को भी ईरानी हमलों से जोड़ा जा रहा है, जहां स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। लगातार बढ़ते इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका असर तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही इस संघर्ष को कूटनीतिक स्तर पर नहीं सुलझाया गया, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसके परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं।


