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Tuesday, January 13, 2026

विकास की रफ्तार को मिले नए पंख — योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला

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शरद कटियार

तीन दशकों बाद उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक ऐसा बदलाव आया है, जो न केवल विकास की रफ्तार को गति देगा बल्कि प्रशासनिक ढांचे में विश्वास की भावना भी मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) का लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों को पाँच गुना बढ़ाने का निर्णय इसी दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

यह परिवर्तन केवल आंकड़ों में वृद्धि नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया को विकेन्द्रीकृत करने की सोच का प्रतीक है। अब अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक को परियोजनाओं पर अधिक स्वायत्तता मिलेगी। इसका अर्थ यह है कि सड़क, पुल, भवन, और अन्य अधोसंरचनात्मक परियोजनाएँ, जो पहले अनुमोदन की लंबी प्रक्रिया में अटक जाती थीं, अब तेज़ी से मंजूरी पा सकेंगी।

वास्तव में, यह निर्णय उस मानसिकता में बदलाव का संकेत है जहाँ सरकार ने अपने अभियंताओं पर विश्वास जताया है। मुख्यमंत्री का यह कथन — “अधिकारियों पर भरोसा हमारा संकल्प है, जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा” — प्रशासनिक सुधार के सार को व्यक्त करता है। वर्ष 1995 के बाद पहली बार इतने व्यापक पैमाने पर वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण किया गया है। इससे विभागीय जवाबदेही बढ़ेगी और फाइलों की निर्भरता घटेगी।

जहाँ एक ओर अधिकारी स्वायत्त निर्णय ले सकेंगे, वहीं दूसरी ओर उनके निर्णयों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर होगी — यह सशक्तिकरण के साथ उत्तरदायित्व की संतुलित व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त, यह सुधार भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में सहायक हो सकता है। जब अधिकारों की परतें घटती हैं, तो अनावश्यक अनुमोदन और “कमिशन संस्कृति” का दायरा भी सिमटता है।

विशेषज्ञ इस फैसले को नीतिगत सुधार का बड़ा कदम मान रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश को बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई ऊँचाई तक पहुँचाने की क्षमता रखता है। राज्य में सड़कों, पुलों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण की जो गति पिछले वर्षों में बढ़ी है, यह निर्णय उस प्रक्रिया को और सशक्त करेगा।

विकास का असली चेहरा तब उभरता है जब प्रशासनिक तंत्र को विश्वास और अधिकार दोनों मिलते हैं। योगी सरकार ने यह साबित कर दिया है कि नीतिगत स्थिरता, संस्थागत स्वायत्तता और पारदर्शी शासन ही विकास की असली कुंजी हैं।
तीस वर्षों के इंतजार के बाद लिया गया यह निर्णय उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में “विश्वास आधारित शासन” की पुनर्स्थापना है।

अगर इस सुधार का सही क्रियान्वयन हुआ, तो यह राज्य के विकास मॉडल को नई दिशा देगा — जहाँ “निर्णय में देरी” की जगह “समय पर परिणाम” संस्कृति स्थापित होगी। सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधार की किताब में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज किया जाएगा।

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