– फ्रांस में हिंसा-आगजनी; कई जगह गिरफ्तारियां
नई दिल्ली। यूरोप के छह देशों में बढ़ती महंगाई, महंगी शिक्षा, बेरोजगारी और आवास संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज होने की खबरें सामने आई हैं। फ्रांस, इटली, ग्रीस, बेल्जियम और अल्बानिया समेत कई देशों में छात्र, युवा और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख शिकायतों में शिक्षा की खराब व्यवस्था, शिक्षकों की कमी, महंगे किराए और रोजगार के सीमित अवसर शामिल हैं। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, जबकि कई इलाकों में हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को कार्रवाई करनी पड़ी और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इन आंदोलनों ने यूरोप के कई हिस्सों में युवाओं की आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर बहस तेज कर दी है।
फ्रांस में 17 अक्टूबर को 140 शहरों में प्रदर्शन होने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, करीब आठ लाख लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हुए, जिनमें छात्र संगठनों के अलावा ट्रेड यूनियन और विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारी भी मौजूद थे। पेरिस, मार्सेई और बोर्डो समेत कई शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें सामने आईं। लीमोज में ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने और कई वाहनों को नुकसान पहुंचने की भी सूचना दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अक्टूबर तक करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, 500 से अधिक पुलिसकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और दमकलकर्मियों के घायल होने की खबर भी सामने आई। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा की। सरकार का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का फायदा उठाया। हालांकि, इन आंकड़ों और घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
इटली में छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था और उससे जुड़ी समस्याओं के विरोध में कई स्कूलों पर कब्जा करने की खबरों के बीच अपना आंदोलन तेज किया है। ग्रीस में छात्र हॉस्टलों की कमी और बढ़ते किराए के खिलाफ संसद के सामने टेंट लगाकर विरोध जता रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि विद्यार्थियों के लिए किफायती आवास की व्यवस्था की जाए, ताकि आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। बेल्जियम में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं। इन देशों में शिक्षा का बढ़ता खर्च और रहने की महंगी व्यवस्था युवाओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा और आवास जैसी बुनियादी जरूरतें आम लोगों की पहुंच में रहनी चाहिए। हालांकि, अलग-अलग देशों में आंदोलन के कारण और मांगें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती हैं।
अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा के खिलाफ कई महीनों से विरोध प्रदर्शन जारी रहने की जानकारी दी गई है। शुरुआत में प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणी तट पर प्रस्तावित एक लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना का विरोध किया था, जिसका संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से बताया गया है। प्रदर्शनकारियों ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव और फैसलों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। समय के साथ भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और युवाओं की आर्थिक समस्याएं भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दे बन गईं। रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के कार्यालयों में आग लगाए जाने की घटना का भी उल्लेख है। यूरोप के विभिन्न देशों में जारी इन प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि आर्थिक दबाव और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें व्यापक असंतोष का कारण बन रही हैं। आने वाले दिनों में इन आंदोलनों की दिशा सरकारों की प्रतिक्रिया, बातचीत और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर निर्भर करेगी।


