उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट देने से पहले उनके कामकाज, जनता के बीच लोकप्रियता और क्षेत्र में सक्रियता का आकलन किए जाने की तैयारी है। अमर उजाला की 18 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व प्रत्याशियों के चयन में जीत की संभावना को प्रमुख आधार बनाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, विधायकों के कामकाज और उनकी छवि को लेकर स्थानीय संगठन से फीडबैक लिया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि विधायक जनता की समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाते हैं, क्षेत्र में कितने सक्रिय हैं और लोगों के साथ उनका जुड़ाव कैसा है। सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने में उनकी भूमिका भी आकलन का हिस्सा हो सकती है।
टिकट के चयन में जिला और क्षेत्रीय संगठन के पदाधिकारियों की राय भी महत्वपूर्ण होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विधायकों के तालमेल, स्थानीय स्तर पर असंतोष और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन करेगी। जिन सीटों पर मौजूदा विधायक के खिलाफ नाराजगी सामने आएगी, वहां दूसरे उम्मीदवारों के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
वहीं, पिछले विधानसभा चुनाव में हारी हुई सीटों पर भाजपा नए और मजबूत चेहरों की तलाश कर सकती है। हालांकि, अभी किसी विधायक का टिकट कटने या किसी नए उम्मीदवार को टिकट मिलने का अंतिम फैसला घोषित नहीं हुआ है। फिलहाल, कामकाज का आकलन, स्थानीय संगठन का फीडबैक और चुनाव जीतने की संभावना संभावित टिकट चयन के प्रमुख आधार बताए जा रहे हैं।


