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Friday, October 16, 2026

जो कद्र न करें, उन्हें अपनी आत्मा से बेदखल कर दीजिए

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शरद कटियार
जीवन में सबसे बड़ी भूल तब होती है, जब हम उन लोगों को अपने दिल में सबसे ऊंचा स्थान दे देते हैं, जिनकी नजरों में हमारी कोई कीमत ही नहीं होती। हम उनके लिए अपनी खुशियां छोड़ देते हैं, अपनी पसंद बदल लेते हैं, अपने स्वाभिमान से समझौता कर लेते हैं, लेकिन बदले में हमें मिलता है तो सिर्फ उपेक्षा, अनदेखी और कभी-कभी अपमान।

सच तो यह है कि हर किसी को अपनी जिंदगी में जगह देना जरूरी नहीं होता। कुछ लोग हमारी जिंदगी में इसलिए आते हैं कि हमें रिश्तों की अहमियत समझा सकें, तो कुछ यह सिखाने के लिए कि अपनी कीमत कभी किसी दूसरे के व्यवहार से तय नहीं करनी चाहिए।

जो आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करता, उसे बार-बार अपनी अहमियत समझाना भी आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने जैसा है। क्योंकि जहां आपके होने और न होने से किसी को फर्क नहीं पड़ता, वहां अपनी मौजूदगी साबित करने की कोशिश आखिर कितनी देर तक की जा सकती है?

याद रखिए, प्रेम हो या मित्रता, परिवार हो या कोई दूसरा रिश्ता…रिश्ते तभी खूबसूरत होते हैं, जब उनमें सम्मान, विश्वास और अपनापन दोनों तरफ से हो। एकतरफा प्रयास कुछ समय तक रिश्ता चला सकते हैं, लेकिन मन को सुकून नहीं दे सकते। किसी को बार-बार मनाना, अपनी सफाई देना और उसकी बेरुखी के बावजूद उसके पीछे भागते रहना धीरे-धीरे इंसान को भीतर से थका देता है।
इसलिए जिंदगी में एक समय ऐसा जरूर आना चाहिए, जब इंसान दूसरों को बदलने की कोशिश छोड़कर खुद के लिए खड़ा होना सीख जाए। हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं, हर आरोप की सफाई देना जरूरी नहीं और हर रिश्ते को आखिरी सांस तक ढोना भी जरूरी नहीं।
जो लोग आपकी कद्र नहीं करते, उन्हें अपनी आत्मा से बेदखल कर दीजिए। इसका अर्थ नफरत करना नहीं, बल्कि अपने मन को उस बोझ से मुक्त करना है, जो आपको लगातार दुखी करता है। किसी के प्रति दुर्भावना रखे बिना उससे दूरी बना लेना भी एक बड़ी समझदारी है।
क्योंकि आत्मसम्मान का अर्थ किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि खुद को अपमानित होने से बचाना है। मन की शांति का अर्थ दुनिया से लड़ना नहीं, बल्कि उन लड़ाइयों से बाहर निकलना है, जिनमें जीतने के बाद भी इंसान भीतर से हार जाता है।
जिंदगी बहुत छोटी है। इसे उन लोगों की स्वीकृति पाने में मत गंवाइए, जिन्हें आपकी सच्चाई, आपकी भावनाओं और आपके समर्पण की कोई परवाह नहीं। अपने समय को उन लोगों के लिए बचाकर रखिए, जिनके पास आपके लिए सम्मान है, जिनकी मौजूदगी आपको कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाती है।
और सबसे जरूरी बात,किसी के चले जाने से आपकी कीमत कम नहीं हो जाती। किसी के नजरअंदाज करने से आपका अस्तित्व छोटा नहीं हो जाता। किसी के बदल जाने से आपकी अच्छाई समाप्त नहीं हो जाती।
अपने जीवन में ऐसे मुकाम पर पहुंचिए, जहां किसी की बेरुखी आपको तोड़ न सके, किसी की उपेक्षा आपकी नींद न छीन सके और किसी का बदलता व्यवहार आपके आत्मसम्मान को डिगा न सके।
याद रखिए, हर किसी को अपने दिल में जगह देना उदारता हो सकती है, लेकिन गलत लोगों को वहां से विदा कर देना आत्मसम्मान है।
जो कद्र न करें, उन्हें मन से उतार दीजिए। जो सम्मान न दें, उनसे दूरी बना लीजिए और जो आपके सुकून को छीन लें, उन्हें अपनी जिंदगी पर हावी मत होने दीजिए।क्योंकि अंततः जिंदगी में सबसे जरूरी यह नहीं कि कितने लोग आपके साथ हैं, बल्कि यह है कि आप खुद के साथ कितने सुकून में हैं।आत्मसम्मान बचाकर रखिए, मन की शांति संभालकर रखिए। दुनिया में रिश्ते फिर बन जाएंगे, लेकिन खुद से रिश्ता टूट गया तो जिंदगी का सुकून लौटाना मुश्किल हो जाएगा।

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