– बेवर पुलिस की पुनर्विवेचना के बाद अदालत पहुंचा मामला
– 22 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख
– पुराने मुकदमे की जांच और पुलिस की कार्रवाई
मैनपुरी/फर्रुखाबाद।करीब 21 साल पुराने दंपति हत्याकांड में पुलिस की पुनर्विवेचना के बाद कानूनी कार्रवाई ने नया मोड़ ले लिया है। मैनपुरी जिले के बेवर थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में माफिया अनुपम दुबे और उसके भाई अनुराग उर्फ़ डब्बन दुबे के खिलाफ पुलिस ने 550 पन्नों का आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया है। विवरण के अनुसार, अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए 22 अक्टूबर की तारीख तय की है। पुराने मामले में इतने लंबे अंतराल के बाद हुई कार्रवाई ने विवेचना की दिशा, पहले की पुलिस जांच और दोबारा जुटाए गए साक्ष्यों के बाद पुलिस ने कार्यवाही की है।
हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होना और अदालत का उस पर संज्ञान लेना दोषसिद्धि नहीं है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
मामला नवाबगंज निवासी कौशल किशोर दुबे और उनकी पत्नी कृष्णा दुबे की हत्या से संबंधित है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दंपति की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद बेवर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। मृतक की पुत्री राधिका दुबे की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।
मुकदमे में अनुपम दुबे, उनके भाई डब्बन दुबे समेत कई अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद मामले की जांच लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।
मामले में नया घटनाक्रम तब सामने आया, जब मृतक की पुत्री राधिका दुबे ने पुलिस अधीक्षक से दोबारा जांच कराने की मांग की। बीती 26 फरवरी को पुलिस अधीक्षक ने पुनर्विवेचना के आदेश जारी किए। इसके बाद बेवर पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल, साक्ष्यों के संकलन और आरोपियों से पूछताछ जैसी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने अनुपम दुबे से मथुरा जेल में पूछताछ भी की। मामले में न्यायालयों में कानूनी कार्यवाही का भी उल्लेख है। हालांकि, संबंधित आदेशों और याचिकाओं का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके संबंध में इससे आगे कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पुलिस ने पुनर्विवेचना पूरी करने के बाद अनुपम दुबे और उनके भाई डब्बन दुबे के खिलाफ करीब 550 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। ज़ो बीते सात महीने तक चली जांच का परिणाम है। पुलिस का निष्कर्ष आरोपपत्र में दर्ज साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर है, इन साक्ष्यों की स्वीकार्यता और आरोपों की पुष्टि का फैसला अदालत करेगी।
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शुरुआती जांच में अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने के बाद दोबारा विवेचना हुई और अब दो आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत तक पहुंचा है। इससे पुराने आपराधिक मामलों की जांच में सामने आने वाले नए तथ्यों और शिकायतकर्ता की पुनर्विवेचना की मांग के महत्व पर भी ध्यान गया है।
पुराने मुकदमे में अनुपम दुबे और उनके भाई के अलावा कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। मामले मे लालू उर्फ प्रभात पांडेय, सरोज शर्मा, नरेंद्र और बांबी जाटव के नाम भी दर्ज हैं। शुरुआती जांच में इन आरोपियों के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने का उल्लेख है।


