उत्तराखंड में इन दिनों भालुओं की आवाजाही आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। चमोली और उत्तरकाशी समेत प्रदेश के कई इलाकों में भालुओं के दिखाई देने और हमलों की घटनाओं के बीच वन विभाग सतर्क हो गया है। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंगलों के आसपास निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दियों में हाइबरनेशन यानी शीतनिद्रा की अवधि से पहले भालू अधिक भोजन तलाशते हैं। इस दौरान वे शरीर में ऊर्जा और चर्बी जमा करने की कोशिश करते हैं। भोजन की तलाश में भालू कभी-कभी जंगलों से निकलकर गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं।
भालुओं की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वन्यजीवों की आवाजाही पर नजर रखने के साथ ही स्थानीय लोगों को संभावित खतरे के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि जंगलों और सुनसान रास्तों पर अकेले जाने से बचें तथा भालू दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे छेड़ने की कोशिश न करें। किसी भी वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि समय रहते सुरक्षा के उपाय किए जा सकें।


