(व्यंग गीत)
सूर्या अग्निहोत्री
डिप्टी एडिटर यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप
वोट को चोरी होते देखा,
पेट्रोल में गन्ना भरते देखा।
छात्र रोड पर पिटते देखा,
चंदा चोरी होते देखा
पुलिस को आगे करते देखा।
देश को पूरा डुबा जाये
कैसा चौकीदार ये भइया!
कुछ बोलो तो ईडी आए,
और घर से निकले रुपइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!
खतरे में हिंदू पड़ते देखा,
एयरपोर्ट पे नाम भी लगते देखा।
रुपये को मैने गिरते देखा,
नेहरू के ऊपर जीते देखा
धमाकों से देश को हिलते देखा।
वादों की रेल मंगल को जाए,
सब झूठा सपना भईया?
कुछ बोलो तो ईडी आए,
और घर से निकले रुपइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!
पेट्रोल को सोना बनते देखा,
महँगाई को बढ़ते देखा।
तेल के दाम को चढ़ते देखा,
सोना खरीद पे रोकते देखा।
संसद में मौन भी बैठे देखा।
जनता पूछे, कहाँ गया है राहत का वह पईया?
विदेश यात्रा छोड़के अब हमरी भी सुनलो भइया
कुछ बोलो तो ईडी आए,
और घर से निकले रुपइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!
पत्रकार को बंदी बनते देखा,
सवाल पर पहरा लगते देखा।
मनमानी इन्हें करते देखा,
गांधी को गाली बकते देखा।
दिल्ली को loc बनते देखे।
लोकतंत्र खतरे में जाए,
क्यों सुनते नहीं हो भईया?
सवालों से ये डर जाए
अब तो जवाब दो भईया!
कुछ बोलो तो ईडी आए,
और घर से निकले रुपइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!
अंधभक्त चिल्लाये रहे हैं,
जय गंगा, जय गइया!


