कानपुर
धनकुट्टी इलाके में गुरुवार रात जलती मशालें और हंसिया लेकर दौड़ती भीड़, लोगों की चीख-पुकार और सड़कों पर पसरा सन्नाटा देखकर ऐसा लगा मानो शहर में दंगा हो गया हो। भीड़ ‘मार दो’ के नारे लगा रही थी, जबकि लोग डर के मारे घरों में छिपे नजर आए। हालांकि, यह वास्तविक घटना नहीं, बल्कि फिल्म ‘गांधी एंड माय मदर’ की शूटिंग का दृश्य था। फिल्म की कहानी 1940 के दशक में बंगाल में हुई हिंसा की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
उस दौर को वास्तविक रूप देने के लिए शूटिंग स्थल पर दंगों के बाद उजड़े घरों का सेट तैयार किया गया। दुकानों के बोर्ड और बैनर भी बांग्ला भाषा में बदल दिए गए, ताकि उस समय के माहौल को पर्दे पर सजीव तरीके से दिखाया जा सके। फिल्म की शूटिंग में 1940 के दशक की मिलिट्री जीप के साथ ब्रिटिश ब्रांड की मॉरिस माइनर कार का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इन व्यवस्थाओं के जरिए पुराने दौर की परिस्थितियों को दोबारा दर्शाने की कोशिश की गई।
फिल्म की शूटिंग गुरुवार शाम करीब 6 बजे शुरू हुई और शुक्रवार सुबह 5 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर चलती रही। रात के समय फिल्माए गए दृश्यों में हिंसा के दौर का भय और अफरा-तफरी दिखाने के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। धनकुट्टी की गलियों को उस समय के परिवेश के अनुरूप सजाया गया, जिससे शूटिंग के दौरान पूरा इलाका पुराने दौर जैसा दिखाई देने लगा।
‘गांधी एंड माय मदर’ का निर्देशन फिल्मकार सुधीर मिश्रा कर रहे हैं। फिल्म में अभिनेता मनोज बाजपेयी महात्मा गांधी की भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ अभिनेता सौरभ शुक्ला और अभिनेत्री दिव्या दत्ता भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की शूटिंग शुक्रवार को पूरी होने की जानकारी दी गई है। कानपुर में तैयार किए गए इन दृश्यों के माध्यम से फिल्म में 1940 के दशक की ऐतिहासिक परिस्थितियों और बंगाल में हुई हिंसा को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।


