नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन ने पांच पूर्व न्यायाधीशों का एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने की घोषणा की है। आयोग एसआईआर की संवैधानिक एवं वैधानिक वैधता, अपनाई गई प्रक्रिया और मतदाताओं पर इसके प्रभाव का अध्ययन करेगा।
आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर करेंगे। आयोग में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बदर दुर्रेज अहमद, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रेखा शर्मा और पटना हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश शामिल हैं।
आयोग की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसुनवाई आयोजित किए जाने की योजना है। इनमें एसआईआर से प्रभावित नागरिकों, नागरिक समाज संगठनों और विशेषज्ञों के पक्ष सुने जाएंगे। इसके साथ ही मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए एक अनुसंधान प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा।
आयोग संबंधित कानूनों, अधिसूचनाओं और मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया की भी कानूनी समीक्षा करेगा। घोषित कार्यक्रम के अनुसार आयोग दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का लक्ष्य रखता है।
आयोग को वरिष्ठ अधिवक्ताओं और वकीलों की एक टीम कानूनी सलाह देगी। इसमें कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, राजू रामचंद्रन, सी.यू. सिंह, वृंदा ग्रोवर, रेबेका मैमन जॉन, प्राशांतो चंद्र सेन और वारिशा फरासत सहित अन्य अधिवक्ताओं के नाम शामिल हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि यह लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन द्वारा गठित स्वतंत्र, गैर-सांविधिक आयोग है। यह सर्वोच्च न्यायालय, निर्वाचन आयोग या केंद्र सरकार द्वारा गठित वैधानिक जांच आयोग नहीं है। इसलिए इसकी रिपोर्ट के निष्कर्ष अपने आप किसी सरकारी संस्था या अदालत पर बाध्यकारी नहीं होंगे।


