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Thursday, October 1, 2026

सारी जांच सीबीआई को दे दें, उत्तर प्रदेश पुलिस को भंग ही कर दें”

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– सुप्रीम कोर्ट की तल्ख मौखिक टिप्पणी
– आरोपी मौके पर पकड़ा गया तो प्राथमिकी में ‘अज्ञात’ क्यों?

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कड़ी नाराजगी जताई। एक मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बेहद तल्ख मौखिक टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि जांच इसी तरह की जाएगी तो बेहतर होगा कि सभी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी जाए और उत्तर प्रदेश पुलिस को ही भंग कर दिया जाए। हालांकि, पुलिस को भंग करने या सभी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने का कोई आदेश अदालत ने पारित नहीं किया है। यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से की गई।
मामला प्राथमिकी दर्ज करने और जांच की प्रक्रिया से जुड़ा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि जब आरोपी को मौके से ही पकड़ लिया गया था, तो प्राथमिकी में उसका नाम दर्ज करने के बजाय उसे ‘अज्ञात’ क्यों बताया गया? अदालत ने पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण मांगा।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से पेश किए गए हलफनामे से भी अदालत संतुष्ट नजर नहीं आई। पीठ ने संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में अधिक स्पष्ट और बेहतर हलफनामा दाखिल करने के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा।
अदालत की नाराजगी का केंद्र पुलिस जांच में पारदर्शिता और विश्वसनीयता का सवाल रहा। पीठ ने मौखिक रूप से सवाल उठाया कि यदि पुलिस की कार्रवाई में इस तरह की विसंगतियां सामने आएंगी तो आम जनता पुलिस पर भरोसा कैसे करेगी?
सुनवाई के दौरान की गई तल्ख टिप्पणी को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को भंग करने या राज्य की सभी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने का निर्देश नहीं दिया है। ये बातें अदालत की मौखिक टिप्पणी का हिस्सा थीं।
मामले में अदालत ने फिलहाल संबंधित अधिकारी से बेहतर हलफनामा मांगा है और अगली सुनवाई में मामले की जांच तथा पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों पर आगे विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर पुलिस जांच में पारदर्शिता, प्राथमिकी में सही तथ्यों के उल्लेख और जांच अधिकारियों की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण सवालों को सामने ला दिया है। अदालत की आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका और जांच प्रक्रिया को लेकर न्यायालय क्या निर्देश देता है।

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