फरियादियों के असंतुष्ट फीडबैक पर जिलाधिकारी ने जताई नाराजगी, स्वास्थ्य, बिजली, शिक्षा और कृषि विभाग की शिकायतों में मिली खामियां
फर्रुखाबाद। आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही अधिकारियों को भारी पड़ी। शिकायतों के निस्तारण के बाद फरियादियों से मिले असंतुष्ट फीडबैक को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सीएमओ समेत 13 अधिकारियों के सितंबर माह के वेतन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने पिछले दिनों आईजीआरएस पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में शिकायतों का निस्तारण कागजों पर तो कर दिया गया, लेकिन शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक में असंतोष की स्थिति सामने आई। इससे शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए।
समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, पंचायतीराज विभाग, शिक्षा विभाग और कृषि विभाग से संबंधित शिकायतों में असंतुष्ट फीडबैक की संख्या अधिक पाई गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का केवल औपचारिक निस्तारण करने के बजाय शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि आईजीआरएस शासन की महत्वपूर्ण जनसुनवाई व्यवस्था है। इस पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सीएमओ, बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता शहरी, ग्रामीण और कायमगंज, बीएसए, उप कृषि निदेशक, बीडीओ मोहम्मदाबाद तथा सीएचसी प्रभारी कायमगंज का सितंबर माह का वेतन रोक दिया है।
इसके अलावा एडीओ मोहम्मदाबाद, कमालगंज, कायमगंज, नवाबगंज और शमसाबाद के वेतन पर भी रोक लगाई गई है। इस कार्रवाई के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप की स्थिति है
आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा शिकायत का निस्तारण किया जाता है। इसके बाद शिकायतकर्ता से फीडबैक लिया जाता है। इस फीडबैक में असंतुष्टि मिलने पर शिकायत के निस्तारण की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं।
जिलाधिकारी की समीक्षा में असंतुष्ट फीडबैक की संख्या अधिक मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों को अब शिकायतों के निस्तारण में मौके की स्थिति की जांच करने और शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान करने पर जोर देना होगा।
इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण को लेकर विभागवार जवाबदेही तय करने के पक्ष में है। अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि शिकायतों को केवल पोर्टल पर निस्तारित दिखाने के बजाय उनका वास्तविक समाधान कराया जाए।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब संबंधित विभागों के अधिकारियों पर शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता सुधारने का दबाव बढ़ गया है। आने वाली समीक्षा में असंतुष्ट फीडबैक की स्थिति में क्या कार्रवाई होती है, इस पर भी नजर रहेगी।
आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर 13 अधिकारियों का वेतन रोका


