गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश के हर जिले की पहचान किसी न किसी कुख्यात माफिया और अपराधी के नाम से होती थी। गोरखपुर में डॉक्टरों को अपहरण, रंगदारी और धमकियों का सामना करना पड़ता था। कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी थी कि लोग भय के माहौल में रहते थे। आज प्रदेश उस दौर से बाहर निकल चुका है और विकास के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक इंसेफेलाइटिस गंभीर चुनौती बनी रही। बीमारी के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की मौत होती थी और इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे। सरकार ने बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिए लगातार काम किया, जिसके परिणामस्वरूप इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हासिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। कभी जहां केवल सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज और एमबीबीएस की सीटें थीं, वहीं अब प्रदेश के 75 जिलों में 85 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें करीब चार हजार से बढ़कर 13 हजार से अधिक हो चुकी हैं। इससे प्रदेश के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिलने के साथ लोगों को अपने जिले में ही बेहतर इलाज की सुविधा मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवन बचाने का काम करता है, इसलिए लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि जिला अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रत्येक जिला अस्पताल में 10 डायलिसिस बेड की व्यवस्था से गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूर के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने तथा आम लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया।


