
अब पुलिसिया मारपीट और कॉल रिकॉर्डिंग के बाद सवालों की बौछार
डीआईजी से शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
फर्रुखाबाद। जहानगंज क्षेत्र के कोरीखेड़ा गांव में नौ माह पहले 10 वर्षीय आशुतोष पुत्र चंद्रप्रकाश गुप्ता की हत्या का राज पुलिस अब तक नहीं खोल सकी है। न्याय की उम्मीद में भटक रहे परिवार के साथ पुलिस कार्रवाई ने पूरे मामले को और गरमा दिया है। महिला के साथ मारपीट, बाल पकड़कर जमीन पर पटकने और वीडियो बना रहे युवक से मारपीट के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं वायरल कॉल रिकॉर्डिंग ने मामले में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
परिजनों का आरोप है कि वे नौ माह से अनसुलझी आशुतोष की हत्या का मामला मुख्यमंत्री के सामने रखना चाहते थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पीटा । वायरल वीडियो में थाना प्रभारी निरीक्षक पूनम अवस्थी पर महिला के साथ मारपीट करने और बाल पकड़कर जमीन पर पटकने के विजुअल सामने आ रहे हैं। एक अन्य वीडियो में घटनास्थल पर मोबाइल से रिकॉर्डिंग कर रहे युवक के साथ मारपीट और मोबाइल छीनने की बात कही जा रही है।
उधर, पुलिस का पक्ष है कि दो पक्षों के विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस के साथ अभद्रता की गई, जिसके बाद हल्का बल प्रयोग किया गया। लेकिन इस दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता हुई थी तो उसका वीडियो या अन्य ठोस साक्ष्य अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ।
मामले में वायरल हुई एक फोन रिकॉर्डिंग ने पुलिस कार्रवाई की मंशा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रिकॉर्डिंग में एक दरोगा अंकुल गुप्ता नाम के व्यक्ति से यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि लोग मुख्यमंत्री के पास जाने की जिद पर अड़े हैं और उन्हें समझाया जाए। इसके सामने आने के बाद निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।परिजनों का आरोप है कि थाना प्रभारी ने कार्रवाई के दौरान मुकदमा दर्ज करने की शक्ति और अपने प्रभाव का हवाला देते हुए दबंग रवैया अपनाया।
कप्तान का आशीर्वाद है, कुछ नहीं होगा : पूनम अवस्थी
पीड़ित पक्ष की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि थाना प्रभारी ने अपने परिचितों से कथित तौर पर कहा कि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा और उन्हें पुलिस कप्तान का संरक्षण प्राप्त है। इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है पूनम अवस्थी द्वारा घटना के दौरान पुलिस अधीक्षक को लगातार फोन किए जाने और निर्देश मिलने की बात भी कही गई।
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डीआईजी से मिले परिजन, चाचा ने बताया हाथ टूटने का आरोप
बीते दिन दिवंगत आशुतोष की बहन अंशिका और चाचा प्रेमचंद गुप्ता ने डीआईजी यमुना प्रसाद से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की शिकायत की। प्रेमचंद गुप्ता का आरोप है कि पुलिस की पिटाई में उनका बायां हाथ टूट गया। उनका कहना है कि डीआईजी से शिकायत के बावजूद जिम्मेदार थाना प्रभारी के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि पूर्व में पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देश पर हुई जांच में थाना प्रभारी को क्लीन चिट दे दी गई थी। परिवार का दावा है कि थाना प्रभारी लगातार यह कहती रही हैं कि कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुई थी।
नौ महीने बाद भी हत्या का खुलासा नही
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 10 वर्षीय आशुतोष की हत्या के नौ महीने बाद भी पुलिस खाली हाथ क्यों है परिवार न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है और अब जब वह मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहता है तो पुलिस सख्ती ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित परिवार के समर्थन में अब विभिन्न संगठन भी गांव पहुंचने लगे हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि थाना प्रभारी के खिलाफ जल्द कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में आंदोलन किया जाएगा।
अब निगाहें पुलिस और प्रशासन की जांच पर हैं। वायरल वीडियो, कॉल रिकॉर्डिंग, पुलिस का पक्ष और पीड़ित परिवार के आरोप इन सभी की निष्पक्ष जांच ही यह तय करेगी कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ। साथ ही नौ महीने से न्याय की बाट जोह रहे मासूम आशुतोष के परिवार को यह जवाब भी मिलना चाहिए कि आखिर उसके हत्यारों तक पुलिस कब पहुंचेगी।मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का दावा तभी जमीन पर दिखाई देगा, जब आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों पर बिना किसी दबाव के कार्रवाई होगी।


