236 करोड़ सालाना कमाई का अनुमान
कीव। रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन सरकार अब अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए एडल्ट कंटेंट कारोबार को कानूनी दायरे में लाने और उस पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे सरकार को हर साल करीब 2.5 करोड़ डॉलर यानी 236 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। एक सांसद के मुताबिक, इस रकम से करीब 30 हजार ड्रोन खरीदे जा सकते हैं।
यूक्रेन की संसद ने प्रस्तावित कानून को जुलाई में पहली रीडिंग में मंजूरी दे दी थी। इसके पक्ष में 231 सांसदों ने वोट दिया, जबकि आठ ने विरोध किया। अब बिल को दूसरी रीडिंग के लिए पेश किया जाना है।
प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि मौजूदा कानून में एडल्ट कंटेंट बनाना और बांटना अपराध होने के कारण यह कारोबार बड़े पैमाने पर छिपकर चलता है। इससे पुलिस कार्रवाई के साथ भ्रष्टाचार और रिश्वत की शिकायतें भी सामने आती हैं। कारोबार को कानूनी मान्यता मिलने पर स्पष्ट नियम बनाए जा सकेंगे और पुलिस गंभीर अपराधों पर ज्यादा ध्यान दे सकेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में करीब 8 हजार यूक्रेनियों ने ओनली फैन्स के जरिए 13.1 करोड़ डॉलर से अधिक कमाए थे। हालांकि यह पूरे एडल्ट कंटेंट कारोबार का आंकड़ा नहीं है। मौजूदा कानून के कारण क्रिएटर्स के लिए अपनी आय घोषित कर उस पर टैक्स देना भी जोखिम भरा है, क्योंकि पहचान सामने आने पर कानूनी कार्रवाई का डर रहता है।
एडल्ट कंटेंट क्रिएटर स्वितलाना द्वोर्निकोवा का दावा है कि वह अब तक करीब 9 लाख डॉलर यानी 8.5 करोड़ रुपए टैक्स चुका चुकी हैं। उन्होंने इस कारोबार को कानूनी बनाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की वेबसाइट पर याचिका भी दायर की थी, जिसे 25 हजार से ज्यादा लोगों का समर्थन मिला।
प्रस्ताव में वयस्कों के बीच बनाए गए एडल्ट कंटेंट को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की बात है, लेकिन बच्चों से जुड़ी पोर्नोग्राफी को अपराध ही रखा जाएगा। ऐसे मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव है।
यूक्रेन फरवरी 2022 से रूस के साथ युद्ध लड़ रहा है। विश्व बैंक के मुताबिक, 2025 में यूक्रेन ने सुरक्षा और रक्षा पर करीब 3.83 ट्रिलियन ह्रीव्निया खर्च किए, जो उसकी जीडीपी का लगभग 42.9% था। अगस्त 2026 में यूक्रेन के नए रक्षा मंत्री ने सैन्य बजट में करीब 27 अरब डॉलर की कमी की बात कही थी।
ऐसे में एडल्ट कंटेंट पर प्रस्तावित टैक्स से मिलने वाली 236 करोड़ रुपए की रकम युद्ध की जरूरतों के मुकाबले छोटी जरूर है, लेकिन सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने का नया जरिया बन सकती है।


