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Thursday, July 9, 2026

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई उड़ान

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यूरेनियम, रक्षा, व्यापार और हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर कई ऐतिहासिक समझौते

मेलबर्न/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊंचाई दे दी है। गुरुवार को मेलबर्न में प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के बीच वार्षिक शिखर बैठक के बाद दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौतों और संयुक्त घोषणाओं पर सहमति जताई। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।

संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। वर्ष 2022 में हुए आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब दोनों देश मुक्त व्यापार, निवेश, नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे।

दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि परमाणु ऊर्जा सहयोग रही। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन, ऊर्जा सुरक्षा और वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवाचार गलियारा विकसित किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के रक्षा उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थान मिलकर नई तकनीक विकसित करेंगे। इसके अलावा जहाज निर्माण, मरम्मत और रखरखाव, समुद्री सुरक्षा तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं और इसके खिलाफ संयुक्त एवं निर्णायक लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने वैश्विक संघर्षों का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति को बताया तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में महत्वपूर्ण खनिज गलियारा (क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर) विकसित करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और स्वच्छ ईंधन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत के बंदरगाह, रेलवे, हवाई अड्डे, सड़क, शहरी विकास और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में निवेश का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के विशाल पेंशन फंड भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में निवेश कर दीर्घकालिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

शिक्षा और जनसंपर्क को दोनों देशों की साझेदारी का सबसे मजबूत आधार बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दोनों देश विश्वविद्यालयों, छात्रों और शोध संस्थानों के बीच आदान-प्रदान को और बढ़ावा देंगे।

खेल सहयोग का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती टेस्ट क्रिकेट की तरह मजबूत, भरोसेमंद और लंबे समय तक चलने वाली है। आने वाले वर्षों में दोनों देशों में ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों जैसे बड़े आयोजन खेल, पर्यटन और आर्थिक सहयोग को नई गति देंगे।

विदेश मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री के मेलबर्न स्थित गवर्नमेंट हाउस में औपचारिक स्वागत को दोनों देशों की मजबूत और स्थायी रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज को भारत आने का निमंत्रण दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती कूटनीतिक और सामरिक भूमिका को और मजबूत करने वाली साबित होगी।

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