एनएचएआई के अधिकृत सॉफ्टवेयर के समानांतर चल रही थी व्यवस्था, वाराणसी समेत 14 ठिकानों पर कार्रवाई
लखनऊ। देश के कई टोल प्लाजा पर कथित तौर पर एनएचएआई के अधिकृत सॉफ्टवेयर के समानांतर एक अलग सॉफ्टवेयर के जरिए करोड़ों रुपये की वसूली किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने मामले की जांच के सिलसिले में सात राज्यों में एक साथ छापेमारी की। वाराणसी समेत अलग-अलग स्थानों पर कुल 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई टोल प्लाजा पर समानांतर व्यवस्था संचालित कर कथित वित्तीय अनियमितता और बड़े पैमाने पर धन की हेराफेरी के आरोपों से जुड़ी है। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद टोल वसूली की व्यवस्था और उससे जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
जांच के केंद्र में कथित तौर पर ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसे एनएचएआई की अधिकृत टोल वसूली व्यवस्था के समानांतर इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। आरोप है कि इस व्यवस्था के माध्यम से टोल प्लाजा पर होने वाले लेनदेन में हेराफेरी की गई और बड़ी रकम का हिसाब-किताब अलग सिस्टम में रखा गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह खेल केवल एक-दो टोल प्लाजा तक सीमित नहीं था। कथित तौर पर 200 से अधिक टोल प्लाजा तक इस समानांतर व्यवस्था के तार जुड़े होने की बात सामने आई है। मामले में करीब 100 करोड़ रुपये के कथित खेल की जांच की जा रही है।
ईडी की कार्रवाई में शिवा बिल्डटेक के मालिकों से जुड़े ठिकाने भी शामिल बताए जा रहे हैं। एजेंसी की टीमें संबंधित परिसरों में दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि समानांतर सॉफ्टवेयर व्यवस्था किस तरह तैयार की गई, इसे किन-किन टोल प्लाजा पर इस्तेमाल किया गया और इससे प्राप्त धन का लेनदेन किन लोगों या संस्थाओं के माध्यम से हुआ।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआती कड़ी मिर्जापुर के अतरौला टोल प्लाजा से सामने आई थी। वहां विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर टोल वसूली में चल रही अनियमितताओं और समानांतर व्यवस्था का खुलासा हुआ था।
एसटीएफ की जांच में सामने आए तथ्यों और उसके बाद जुटाई गई जानकारी के आधार पर अब प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग समेत वित्तीय अनियमितताओं के पहलू से जांच को आगे बढ़ाया है।
ईडी की लखनऊ जोनल टीम की ओर से सात राज्यों में एक साथ कार्रवाई किए जाने को मामले की गंभीरता से जोड़कर देखा जा रहा है। वाराणसी समेत 14 ठिकानों पर चल रही तलाशी के दौरान एजेंसी कथित सॉफ्टवेयर संचालन, टोल वसूली, बैंक खातों और कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से संबंधित साक्ष्य जुटा रही है।
फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है। तलाशी पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित समानांतर टोल वसूली व्यवस्था में कौन-कौन लोग शामिल थे और करीब 100 करोड़ रुपये के बताए जा रहे इस पूरे खेल में वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ।


