तेहरान। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। हाल ही में हुए संघर्ष विराम और तेल निर्यात से जुड़े समझौते के टूटने के बाद दोनों देशों के बीच हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, जबकि ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियां तेज कर दी हैं। लगातार बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि समझौते के तहत ईरान को सीमित मात्रा में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल निर्यात की अनुमति दी गई थी, जबकि बदले में उसे सैन्य गतिविधियों पर संयम बरतना था। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने इसे समझौते का उल्लंघन मानते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और नौसैनिक अड्डों को निशाना बनाते हुए व्यापक कार्रवाई की। इसके साथ ही ईरान को दी गई तेल निर्यात संबंधी रियायतें भी समाप्त कर दी गईं।
संघर्ष का दायरा अब ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रह गया है। खाड़ी देशों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कुवैत समेत कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका के चलते एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं तथा नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की गई है। क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों से पूरे पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
इस संकट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। ऐसे में इस मार्ग पर बढ़ते खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक असर पड़ सकता है।


