रूहानी आवाज से देशभर में बनाई खास पहचान
बदायूं
बदायूं की समृद्ध सूफी और सांगीतिक परंपरा को देशभर में पहचान दिलाने वाले मशहूर सूफी फनकार जुनैद सुल्तानी ने अपनी रूहानी आवाज और दमदार गायकी के जरिए संगीत जगत में खास मुकाम बनाया है। उनकी सूफियाना गायकी में शास्त्रीय संगीत की गहराई और क़व्वाली की रवायत का खूबसूरत संगम देखने को मिलता है। उनकी उपलब्धि से बदायूं के लोगों और संगीत प्रेमियों में खुशी का माहौल है।
जुनैद सुल्तानी ने शास्त्रीय संगीत की तालीम अपने मामू पद्म विभूषण उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान साहब से हासिल की। वहीं क़व्वाली की बारीकियां उन्होंने अपने वालिद रफ़ीक अहमद और राजा सरफ़राज़ साहब से सीखीं। संगीत की दुनिया में उनका सफर महज गायकी से नहीं, बल्कि बचपन से ही शुरू हो गया था। करीब आठ वर्ष की उम्र में उन्होंने उस्ताद मुबारक खान साहब से तबले की तालीम लेना शुरू किया।
वालिद ने पहचाना हुनर, परिवार ने बढ़ाया हौसला
जुनैद के पिता रफ़ीक अहमद ने बेटे की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें संगीत की बारीकियां सीखने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। परिवार की सांगीतिक विरासत और बुजुर्ग उस्तादों से मिली तालीम ने जुनैद की गायकी को अलग पहचान दी। वह अपनी सफलता में अपने वालिद, उस्तादों और परिवार की दुआओं को सबसे अहम मानते हैं।
सूफी संगीत में जुनैद की प्रस्तुति में आवाज की मिठास के साथ भाव और आध्यात्मिकता की गहराई भी नजर आती है। यही वजह है कि उनकी गायकी को संगीत प्रेमियों के बीच खास पसंद किया जाता है। उन्होंने अपनी मेहनत और लगातार साधना के बल पर स्थानीय मंचों से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की है।
बेटों हसन-हुसैन समेत परिवार में जश्न
जुनैद सुल्तानी की उपलब्धि से उनके परिवार में भी खुशी का माहौल है। उनके बेटे हसन और हुसैन समेत परिजन उनकी कामयाबी पर उत्साहित हैं। बदायूं के लोगों का कहना है कि जुनैद ने अपनी प्रतिभा के जरिए जिले की सांस्कृतिक और सूफी संगीत की परंपरा को नई पहचान दिलाई है।
स्थानीय नागरिकों, संगीत प्रेमियों और शुभचिंतकों ने जुनैद सुल्तानी को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वह आने वाले समय में अपनी रूहानी गायकी से देश-विदेश में बदायूं का नाम और ऊंचा करेंगे। उनकी उपलब्धि को युवा कलाकारों के लिए मेहनत, साधना और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा भी माना जा रहा है।


