लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण में सामने आए 7.50 लाख रुपये के रिश्वत कांड की विजिलेंस जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। मामले में प्रवर्तन विंग से जुड़े कई अफसर और इंजीनियर जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। विजिलेंस टीम ने हाल में एलडीए पहुंचकर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की थी। जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कथित लेन-देन तथा रिश्वत की रकम को लेकर हुई बातचीत से जुड़े साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।
मामले में 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए एलडीए के एक जेई समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद विभागीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहने के संकेत मिल रहे हैं। अधिकारियों की भूमिका, फाइलों की आवाजाही और प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई में कथित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।
विजिलेंस जांच में जेई और एक सुपरवाइजर के मोबाइल फोन से कथित तौर पर कई वॉयस रिकॉर्डिंग मिलने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन रिकॉर्डिंग में रिश्वत की रकम को लेकर बातचीत और सौदेबाजी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। एक पीसीएस अधिकारी और दो इंजीनियर भी जांच एजेंसी के रडार पर बताए जा रहे हैं।
जांच एजेंसी एलडीए से जुड़ी आईजीआरएस शिकायतों के रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। शिकायत कब आई, किस अधिकारी या इंजीनियर के पास भेजी गई, उस पर क्या कार्रवाई हुई और कार्रवाई के दौरान किन स्तरों पर फाइल आगे बढ़ी—इन बिंदुओं को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे यह पता लगाने का प्रयास है कि कहीं शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया का इस्तेमाल अवैध वसूली या दबाव बनाने के लिए तो नहीं किया गया।
एलडीए का प्रवर्तन विंग अवैध निर्माण और संबंधित कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में रिश्वत कांड के बाद इस विंग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर विशेष नजर है। विजिलेंस यह भी जांच रही है कि गिरफ्तार आरोपियों तक रिश्वत की मांग कैसे पहुंची और इसमें किसी वरिष्ठ अधिकारी या अन्य कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।
मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि जांच एजेंसी अब मोबाइल रिकॉर्डिंग, दस्तावेज, फाइलों की आवाजाही और आईजीआरएस शिकायतों जैसे अलग-अलग स्रोतों को जोड़कर कथित रिश्वत नेटवर्क की तस्वीर तैयार करने में जुटी है। हालांकि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, उनके खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
7.50 लाख रुपये के रिश्वत कांड ने एलडीए की कार्यप्रणाली और प्रवर्तन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि विजिलेंस जांच की अगली कार्रवाई में कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और कथित रिश्वत नेटवर्क की जड़ कितनी गहराई तक पहुंचती है।


