पहले धर्मेंद्र प्रधान की विदाई, फिर शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार की छुट्टी
प्रशांत कटियार
नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय में महज 17 दिन के भीतर उच्च शिक्षा सचिव बदलने के फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। 23 जुलाई को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को विनीत जोशी की जगह उच्च शिक्षा सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन 10 अगस्त को सरकार ने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए दीप्ति गौड़ मुखर्जी को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त कर दिया। गंगवार को उनके पूर्व विभाग पशुपालन एवं डेयरी विभाग में ही सचिव बनाए रखा गया है।
पहले मंत्री गए, अब सचिव भी बदले
परीक्षा विवाद और छात्रों के विरोध के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इसी घटनाक्रम के बीच उच्च शिक्षा विभाग में भी प्रशासनिक बदलाव हुआ। 23 जुलाई को गंगवार को नई जिम्मेदारी दी गई और महज 17 दिन बाद उनसे यह जिम्मेदारी वापस ले ली गई। एक ही दौर में मंत्री और उच्च शिक्षा सचिव स्तर पर हुए बदलाव ने मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। सवाल यह भी है कि जब 23 जुलाई को गंगवार को जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया था, तो महज 17 दिन में ऐसी क्या परिस्थितियां पैदा हो गईं कि सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान के मामले में छात्रों के विरोध और विपक्ष के लगातार हमलों के बीच इस्तीफा सामने आया, लेकिन नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव पद से हटाए जाने की वजह सरकार के आदेश में स्पष्ट नहीं की गई है।


