पार्टी अनुशासन पर उठे सवाल
फर्रुखाबाद। बहुजन समाज पार्टी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक खींचतान खुलकर सामने आती नजर आ रही है। बसपा के जिला अध्यक्ष नागेंद्र पाल द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए बयान ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। जिला अध्यक्ष ने अपने ही संगठन के कानपुर मंडल के मुख्य कोऑर्डिनेटर जितेंद्र संखवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
नागेंद्र पाल ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मंडल स्तर के पदाधिकारी पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और पार्टी के हितों के विपरीत गतिविधियां कर रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर दूसरी पार्टी से आर्थिक लेन-देन और प्रत्याशियों को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जिला अध्यक्ष को संगठन के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति थी, तो उन्होंने पार्टी के निर्धारित संगठनात्मक मंच पर शिकायत करने के बजाय सार्वजनिक बयान का रास्ता क्यों चुना, बसपा अपने कड़े अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था के लिए जानी जाती है। ऐसे में जिला अध्यक्ष द्वारा सार्वजनिक रूप से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी पर आरोप लगाने से खुद जिला अध्यक्ष की भूमिका और संगठनात्मक मर्यादा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के लिए संगठन में एकजुटता बेहद अहम है। ऐसे समय में जिला संगठन और मंडल स्तर के पदाधिकारी आमने-सामने नजर आएं तो इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।बसपा में अतीत में पार्टी अनुशासन से हटने वाले बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होती रही है। ऐसे में अब निगाहें पार्टी के प्रदेश और शीर्ष नेतृत्व पर हैं कि जिला अध्यक्ष नागेंद्र पाल के सार्वजनिक आरोपों और संगठन के भीतर चल रही खींचतान को लेकर क्या कदम उठाया जाता है।फिलहाल जिला अध्यक्ष के बयान ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि 2027 की चुनावी तैयारियों के बीच फर्रुखाबाद बसपा संगठन में सब कुछ ठीक नहीं है


