लखनऊ। प्रदेश में सोमवार से गेहूं खरीद की प्रक्रिया विधिवत शुरू हो गई है, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद जगी है। इस बार सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। अब तक 2.24 लाख से अधिक किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करा लिया है, जबकि प्रदेश भर में 3574 क्रय केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। खरीद प्रक्रिया 15 जून तक संचालित की जाएगी।
खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा समेत कुल आठ एजेंसियों के माध्यम से इस वर्ष लगभग 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाने की योजना है, जिससे अधिक से अधिक किसानों को सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बदलते मौसम को देखते हुए क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए छाया, पेयजल, बैठने की व्यवस्था समेत सभी जरूरी सुविधाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएं।
सरकार ने किसानों को अतिरिक्त लाभ देते हुए उतराई, छनाई और सफाई के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करने का भी प्रावधान किया है। खाद्य विभाग ने पहले 30 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया था, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर इसे बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है, जिससे अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।
भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए सरकार ने डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली लागू की है, जिसके तहत किसानों को 48 घंटे के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाएगा। बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के उद्देश्य से पूरी खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है।
जिन किसानों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है, वे खाद्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट fcs.up.gov.in या ‘यूपी किसान मित्र’ एप के माध्यम से अपना पंजीकरण या नवीनीकरण करा सकते हैं। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर किसान टोल-फ्री नंबर 18001800150 पर संपर्क कर सकते हैं। सरकार का दावा है कि इस बार खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिल सके।


