– नोएडा के न. 1 द खेतान स्कूल के वाइस चेयरपर्सन से शरद कटियार की सीधी बात
नई दिल्ली | फ्रेंड्स कॉलोनी में शनिवार को एक ऐसी मुलाकात हुई, जिसने साफ कर दिया कि देश का भविष्य सिर्फ नीतियों से नहीं, बल्कि आधुनिक, तकनीकी और दूरदर्शी सोच से तय होगा। यूथ इंडिया न्यूज़ ग्रुप के चीफ एडिटर शरद कटियार की खास बातचीत हुई वेदांत खेतान से,जो खेतान वेलफेयर फाउंडेशन के वाइस चेयरपर्सन होने के साथ शिक्षा जगत में तेजी से एक उभरता हुआ नाम हैं।
देश में पहचान बना चुका द खेतान स्कूल उनकी युवा नेतृत्व क्षमता का उदाहरण है। टाइम्स स्कूल सर्वे के अनुसार, यह संस्थान नोएडा में पहले नई दिल्ली में 15वें और पूरे भारत में 25वें स्थान पर है ,जो इस बात का संकेत है कि नई सोच जमीन पर उतर रही है।
बातचीत की शुरुआत एक सीधे सवाल से हुई,क्या आज की शिक्षा व्यवस्था युवाओं को वास्तव में तैयार कर रही है? इस पर वेदांत खेतान ने बेबाक जवाब दिया,
“अगर शिक्षा सिर्फ डिग्री देने तक सीमित है, तो वह अधूरी है। असली शिक्षा वह है जो सोच बदले, क्षमता बढ़ाए और समाज में सकारात्मक बदलाव लाए।”
उन्होंने “स्टूडेंट फर्स्ट” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यही है कि छात्र केंद्र में नहीं है।
“नीतियां बनती हैं, योजनाएं आती हैं, लेकिन छात्र की जरूरतें अक्सर पीछे छूट जाती हैं। जब तक हर निर्णय में छात्र को प्राथमिकता नहीं मिलेगी, तब तक सुधार अधूरा रहेगा।”
युवाओं को लेकर उनका दृष्टिकोण बेहद स्पष्ट और व्यावहारिक नजर आया।
“आज का युवा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रह सकता। डिग्री जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है स्किल, वैल्यू और अवसर का संतुलन। अगर ये तीनों साथ नहीं होंगे, तो युवा सिर्फ पढ़ा-लिखा रहेगा, तैयार नहीं होगा।”
उन्होंने मौजूदा शिक्षा मॉडल पर भी सवाल उठाए और कहा कि “आज भी कई संस्थान पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, जबकि दुनिया तेजी से बदल रही है। हमारी शिक्षा प्रणाली उस गति से खुद को अपडेट नहीं कर पा रही, और इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।”
समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को लेकर वेदांत खेतान का रुख बेहद स्पष्ट रहा।
“हम समाज से बहुत कुछ लेते हैं संसाधन, अवसर, पहचान। ऐसे में उसे वापस देना भी हमारी जिम्मेदारी है, और यह काम सबसे प्रभावी तरीके से शिक्षा के माध्यम से किया जा सकता है।”
उन्होंने यह भी माना कि आज के युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिशा की कमी है।
“टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन सही मार्गदर्शन और प्लेटफॉर्म की कमी है। अगर युवाओं को सही दिशा और अवसर मिले, तो वे देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।”
अंत में युवाओं के लिए उनका संदेश साफ और असरदार रहा “छोटा मत सोचिए, सीखते रहिए, सवाल पूछिए और खुद को सिर्फ नौकरी तक सीमित मत रखिए समाज के लिए कुछ करने का लक्ष्य रखिए।”
इस पूरी बातचीत में यह साफ दिखा कि वेदांत खेतान की सोच सिर्फ विचारों तक सीमित नहीं, बल्कि एक स्पष्ट विज़न पर आधारित है जहां शिक्षा, स्किल और सामाजिक जिम्मेदारी तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात है।
आज जब देश में शिक्षा और रोजगार को लेकर लगातार बहस हो रही है, ऐसे में यह सोच एक मजबूत दिशा देती है जहां शिक्षा सिर्फ कागज का प्रमाण नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव का माध्यम बन सकती है।
अगर शिक्षा में “स्टूडेंट फर्स्ट” और युवाओं में “परपज़ फर्स्ट” की सोच आ जाए, तो देश का भविष्य न सिर्फ सुरक्षित, बल्कि मजबूत और प्रभावी होगा।
“डिग्री नहीं, बदलाव चाहिए” वेदांत खेतान का बड़ा विज़न


