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Monday, March 30, 2026

अधूरी पड़ी पानी की टंकियां बनीं ‘सफेद हाथी’, वर्षों से जलापूर्ति का इंतजार कर रहे ग्रामीण

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शमशाबाद, फर्रुखाबाद। एक ओर सरकार द्वारा “हर घर नल से जल” जैसी महत्वाकांक्षी योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शमशाबाद विकासखंड क्षेत्र में वर्षों से निर्माणाधीन पानी की टंकियां आज भी अधूरी पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर योजनाएं तो स्वीकृत कर दी जाती हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के चलते इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा। स्थिति यह है कि कई गांवों में टंकियां तो बननी शुरू हुईं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।
बेला सराय गजा गांव का मामला प्रमुख
विकासखंड शमशाबाद के ग्राम बेला सराय गजा में वर्ष 2022-23 के अंतर्गत पानी की टंकी का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। उस समय ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब उनकी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। लेकिन कुछ समय बाद ही निर्माण कार्य अचानक ठप हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य क्यों बंद हुआ, इसकी जानकारी आज तक किसी को नहीं मिल सकी। नतीजतन वर्षों बीत जाने के बावजूद टंकी अधूरी पड़ी है और ग्रामीणों को नल से जल की सुविधा नहीं मिल पा रही।
अधूरी पाइपलाइन और नल की समस्या
क्षेत्र में कहीं पाइपलाइन अधूरी पड़ी है तो कहीं नलों की टोटियां ही नहीं लगाई गई हैं। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन और नल तो हैं, लेकिन टंकी निर्माण अधूरा है। इस वजह से पूरी योजना ही अधर में लटकी हुई नजर आ रही है।
2000 की आबादी हैंडपंपों पर निर्भर
ग्रामीणों के अनुसार गांव की आबादी करीब 2000 के आसपास है, जिन्हें आज भी पेयजल के लिए समरसेबल और इंडिया मार्का हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। गर्मियों के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
अन्य गांवों में भी यही हाल
ग्रामीणों ने बताया कि शमशाबाद क्षेत्र के कई अन्य गांवों में भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। कुइयां संत क्षेत्र के निकट भी वर्षों से टंकी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे वहां के ग्रामीणों में भी रोष है।
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभाग को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि अधूरी पड़ी टंकियां अब ग्रामीणों की नजर में ‘सफेद हाथी’ बन चुकी हैं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए और हर घर तक जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही लापरवाह अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंच सके।

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