लखनऊ, 16 सितंबर। ₹2000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के व्यापारियों में आक्रोश है। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल ने इस शुल्क को वापस लेने की मांग की है।
व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि व्यापारी किसी भी कीमत पर यूपीआई ट्रांजैक्शन चार्ज को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि व्यापारी पहले से ही बैंकों को एसएमएस चार्ज, आईएमपीएस चार्ज, कैश हैंडलिंग चार्ज समेत कई तरह के शुल्क अदा कर रहे हैं। ऐसे में यूपीआई लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
संजय गुप्ता के अनुसार, ₹75,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर एमडीआर की सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय किए जाने की व्यवस्था भी व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक भार का कारण बनेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के शुल्क का अप्रत्यक्ष प्रभाव अंततः ग्राहकों पर पड़ सकता है और इसका बोझ आम जनता को उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार डिजिटल भुगतान और बैंकिंग माध्यम से अधिक से अधिक लेनदेन को बढ़ावा देने की बात करती है। दूसरी ओर, डिजिटल माध्यम से व्यापार करने पर नए-नए शुल्क लगाए जाने से व्यापारी और ग्राहक दोनों हतोत्साहित होंगे।
संजय गुप्ता ने कहा कि व्यापारी अपने संसाधनों से जनता से कर संग्रह कर सरकार के राजस्व में योगदान देते हैं। इसके बावजूद व्यापारियों पर लगातार नए शुल्क और जिम्मेदारियां डाली जा रही हैं, जो उचित नहीं है।
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल ने सरकार से यूपीआई ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग की है। संजय गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन व्यापारियों के हित में आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारियों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त यूपीआई शुल्क स्वीकार नहीं किया जाएगा।


