आगरा। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद रविवार को आगरा पहुंचे। सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान उन्होंने सरकारी स्कूलों की बदहाली, छात्रों की समस्याओं और गन्ना किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने देश में अघोषित इमरजेंसी और हिटलरशाही जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के खिलाफ सभी को आवाज उठानी होगी।
चंद्रशेखर ने कहा कि कई सरकारी स्कूलों में भवन नहीं हैं तो कहीं पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह संसद से लेकर सड़क तक सरकारी स्कूलों की समस्याओं को उठाएंगे और स्वयं स्कूलों का निरीक्षण भी करेंगे।
इसके बाद सूरसदन ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय नव जागृति कठेरिया (धानुक) समाज महासभा के स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे चंद्रशेखर ने युवाओं से पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा, “मेरे पैर छूने या कंधे पर हाथ रखने से कोई बड़ा नेता नहीं बन जाएगा। किताबें पढ़नी होंगी, तभी आगे बढ़ पाएंगे।” उन्होंने नेता की पूजा करने के बजाय विचारों और अधिकारों के लिए खड़े होने की बात कही।
उन्होंने कहा कि समाज उन्हें एक महीने के लिए ताकत दे तो सात दिन में ऐसी व्यवस्था तैयार कर देंगे कि समाज के लोगों की तरफ कोई आंख उठाकर नहीं देख सकेगा। उन्होंने दावा किया कि ऐसा करने में असफल रहे तो अगले दिन इस्तीफा देकर राजनीति छोड़ देंगे।
गन्ने और चीनी के मुद्दे पर भी चंद्रशेखर ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी के बढ़ते दामों का लाभ व्यापारियों और पूंजीपतियों को मिल रहा है, जबकि किसान गन्ने के भुगतान के लिए परेशान हैं। साथ ही उन्होंने सरकार से वर्ष 2017 से 2026 तक महिलाओं के लिए किए गए वादों और योजनाओं का हिसाब देने की मांग की।


