शमशाबाद, फर्रुखाबाद: बीते लगभग 96 घंटे से भगवान भास्कर (Lord Bhaskar) के दर्शन न होने से क्षेत्र में गलन भरी सर्दी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। चार–पांच दिन बीत जाने के बावजूद धूप न निकलने से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गरीब, मजदूर, किसान से लेकर पशु-पक्षी तक इस भीषण ठंड से बेहाल नजर आ रहे हैं।
लगातार घने बादलों, कोहरे और पाले के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। परिणामस्वरूप किसान अपनी फसलों की देखरेख नहीं कर पा रहे हैं। विशेषकर आलू किसानों में चिंता का माहौल है, क्योंकि तुषार पड़ने से आलू की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। आलू खुदाई का कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
मजदूरी ठप, सड़कों पर सन्नाटा
भीषण सर्दी के चलते मेहनत-मजदूरी से जुड़े लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जो लोग निकल भी रहे हैं, उन्हें मजदूरी नहीं मिल पा रही और दिनभर भटकना पड़ रहा है। गांव की गलियों से लेकर कस्बों और सड़कों तक सन्नाटा पसरा हुआ है। एक समय था जब लोग भगवान भास्कर के दर्शन के बाद गलियों में धूप का आनंद लेते नजर आते थे, लेकिन चौथे दिन भी धूप न निकलने से हर तरफ खामोशी छाई हुई है।
महंगाई ने बढ़ाई परेशानी
सर्दी के प्रकोप का सीधा असर महंगाई पर भी देखने को मिल रहा है। शहर से कस्बों और गांवों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो गई है। सब्जियों के दामों में अचानक उछाल आ गया है।
टमाटर ₹80 प्रति किलो
शिमला मिर्च ₹100–120 प्रति किलो
आलू ₹10–15 प्रति किलो
मूली ₹30–40 प्रति किलो
गाजर ₹40 प्रति किलो
फूल गोभी ₹30–40
बंद गोभी ₹20–30
मटर ₹80 प्रति किलो
अदरक ₹100 प्रति किलो
प्याज ₹30–40 प्रति किलो
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि यदि सर्दी का यही आलम बना रहा तो महंगाई और बढ़ सकती है, क्योंकि एक शहर से दूसरे शहर तक सब्जियों की ढुलाई प्रभावित हो रही है।
गरीबों के घरों में बुझता चूल्हा
लगातार सर्दी और महंगाई के कारण गरीब परिवारों के सामने जीवन यापन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। मेहनत मजदूरी पर निर्भर परिवारों के घरों में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है। बच्चे सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार की चपेट में आ रहे हैं, वहीं बुजुर्गों, हृदय रोग और दमा के मरीजों की हालत और ज्यादा खराब हो रही है।
अलाव की व्यवस्था नाकाफी
भीषण ठंड के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं दिख रही है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन इस ओर गंभीर नहीं है। कहीं-कहीं अलाव जल भी रहे हैं तो केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। बेसहारा पशु निजी तौर पर जलाए गए अलावों के आसपास सिमटे नजर आ रहे हैं।
भगवान से राहत की कामना
सर्दी से त्रस्त लोग अब भगवान के मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर गलन भरी सर्दी से निजात दिलाए जाने की कामना कर रहे हैं। आमजन का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह अलाव, कंबल वितरण और अन्य राहत कार्यों पर तुरंत ध्यान दे, ताकि इस भीषण सर्दी में गरीबों और जरूरतमंदों को राहत मिल सके।


