शमशाबाद: मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के पावन अवसर पर ढाई घाट शमशाबाद स्थित माघ मेले में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर विभिन्न पंथों से जुड़े साधु-संतों ने अपने अद्भुत कर्तव्य और शौर्य से जुड़ी कलाओं का प्रदर्शन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संत समाज की एकजुटता और अनुशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को धर्ममय वातावरण में बदल दिया।
रविवार को बांके बिहारी आश्रम से श्री महंत दुर्गा गिरी की अध्यक्षता में भगवान गजानन की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में शामिल साधु-संतों ने पारंपरिक वेशभूषा में धार्मिक ध्वजों और वाद्य यंत्रों के साथ पूरे मेला क्षेत्र का भ्रमण किया। यात्रा गंगा तट के दोनों ओर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
शोभा यात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर संत समाज का स्वागत किया गया। अनेक स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे मेला क्षेत्र में हर-हर महादेव और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।
शोभा यात्रा के दौरान साधु-संतों ने अपने कर्तव्य, साहस और तपस्या से जुड़ी विभिन्न अद्भुत कलाओं का प्रदर्शन किया। इन अनोखे कारनामों को देखकर श्रद्धालु आश्चर्यचकित रह गए। संतों की साधना, अनुशासन और समर्पण ने लोगों के मन में श्रद्धा और आस्था को और प्रगाढ़ कर दिया।
इस अवसर पर श्री पंच 10 नाम आश्रम जूना अखाड़ा के थानापति पूरनं गिरी, मयंक परमात्मा दास, अयोध्या वाले बलराम दास सहित बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित साधु-संत मौजूद रहे। संत समाज की उपस्थिति और सहभागिता ने शोभा यात्रा को ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप प्रदान किया।
मेला क्षेत्र में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
मौनी अमावस्या के इस पावन पर्व पर आयोजित गजानन जी की शोभा यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि संत समाज की एकजुटता और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को भी जीवंत कर दिया।


