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Thursday, March 26, 2026

सादगी का शिखर: एक ऐसा राष्ट्रपति जिसने कुछ नहीं, सब कुछ छोड़ दिया

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शरद कटियार

जब ए. पी. जे. अब्दुल कलाम इस दुनिया से विदा हुए, तो देश ने सिर्फ एक महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति को नहीं खोया, बल्कि एक ऐसी सोच को खो दिया जो सादगी, त्याग और सेवा की मिसाल थी। उनकी मौत के बाद जो सामने आया, उसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।
शिलॉंग में अंतिम सांस लेने वाले इस महान व्यक्तित्व के दिल्ली स्थित कमरे का ताला जब खोला गया, तो हर किसी के मन में यह जिज्ञासा थी कि देश के सर्वोच्च पद पर रह चुके व्यक्ति ने आखिर कितनी संपत्ति छोड़ी होगी। लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला, वहां मौजूद लोगों के सामने एक ऐसा दृश्य था, जिसने “अमीर होने” की परिभाषा ही बदल दी।
कमरे में न कोई तिजोरी थी, न कोई कीमती सामान।
एक कोने में रखे छोटे से संदूक में मात्र कुछ कपड़े—6 शर्ट और 4 पैंट, जिन्हें वे स्वयं धोते थे।
तीन पुराने सूट, जिनमें से एक राष्ट्रपति बनने के समय सिलवाया गया था और वर्षों तक उसी का उपयोग किया गया।
एक साधारण कलाई घड़ी, एक पुराना लैपटॉप, एक वीणा—और लगभग 2500 किताबें।
यही थी उस व्यक्ति की पूरी संपत्ति, जिसने भारत को वैज्ञानिक शक्ति के रूप में नई पहचान दिलाई।
यह सादगी केवल दिखावे की नहीं थी, बल्कि उनके जीवन का मूल सिद्धांत थी। उन्होंने अपनी पूरी सैलरी और पेंशन तक समाज सेवा के लिए समर्पित कर दी। “PURA” जैसे मिशन के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने का सपना देखा और उसे जीते भी रहे।
आज के दौर में, जहां व्यक्ति अपनी पहचान महंगे कपड़ों, गाड़ियों और ब्रांड्स से बनाना चाहता है, वहां कलाम साहब ने यह साबित किया कि असली पहचान इंसान के विचारों और उसके कर्मों से बनती है। उन्होंने कभी संपत्ति नहीं जोड़ी, बल्कि लोगों के दिलों में जगह बनाई।
उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सफलता का अर्थ केवल धन अर्जित करना नहीं है, बल्कि समाज के लिए कुछ कर गुजरना ही सच्ची सफलता है।
आज जब हम अपने आसपास बढ़ते भौतिकवाद और दिखावे को देखते हैं, तो कलाम साहब का जीवन एक प्रेरणा बनकर सामने आता है। वह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपनी जिंदगी में क्या जोड़ रहे हैं—सिर्फ सामान या फिर मूल्य भी?
कलाम साहब ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि इंसान अपनी संपत्ति से नहीं, बल्कि अपनी सोच और अपने योगदान से महान बनता है।
आज जरूरत है कि हम उनके विचारों को अपने जीवन में उतारें। सादगी को अपनाएं, समाज के लिए सोचें और अपने जीवन को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी उपयोगी बनाएं।

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