नई दिल्ली: धोखाधड़ी-रोधी कानून (Anti-fraud law) को मज़बूत करने के लिए, केंद्र सरकार (Central government) ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ का प्रस्ताव रखा है। इसकी एक कॉपी शनिवार (25 जुलाई, 2026) को संसद सदस्यों के बीच बांटी गई थी। संभावना है कि केंद्र सरकार सोमवार (27 जुलाई, 2026) को संसद में यह विधेयक पेश करेगी।
प्रस्तावित कानून 2024 के एक्ट के तहत तय सज़ाओं को काफी कड़ा करता है। इसमें जांच के लिए दो महीने की अनिवार्य समय-सीमा, खास फास्ट-ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराध नेटवर्क के लिए ₹10 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, व्यक्तिगत और संस्थागत अपराधियों के लिए अधिकतम जेल की सज़ा बढ़ाई गई है और साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
खास एनफोर्समेंट यूनिट्स की मदद से केंद्र सरकार जांच का काम संभालने के लिए खास स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बना सकती है। सभी जांच — चाहे वे लोकल पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों या STF ने की हों — 60 दिनों के अंदर पूरी हो जानी चाहिए।
राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन लगातार, रोज़ाना के आधार पर मुकदमों की सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट तय करेंगे। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के अंदर मुकदमे पूरे हो जाने चाहिए। हाई कोर्ट में अपीलों की सुनवाई डिवीज़न बेंच (दो जज) करेगी और उनका निपटारा भी तीन महीने के अंदर हो जाना चाहिए।


