ललितपुर जिले के गिरार थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में एक महिला की आग से हुई संदिग्ध मौत के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में नई दिशा देते हुए मृतका के पति और उसके परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुनः विवेचना के निर्देश पुलिस को दिए हैं। इस आदेश के बाद वर्षों पुराना मामला फिर से चर्चा में आ गया है।
घटना 14 जनवरी 2017 की है, जब गिरार थाना क्षेत्र निवासी सुखराम ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसकी पत्नी प्रार्थना ने गाली-गलौज से आहत होकर खुद पर डीजल डालकर आग लगा ली थी, जिससे उसकी मौत हो गई। उसने इस मामले में अपनी चचेरी बहन रचना और गांव की महिला कुसुम को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने उसी आधार पर दोनों महिलाओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां सत्र परीक्षण के दौरान दोनों महिलाओं के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके और उनकी संलिप्तता सिद्ध नहीं हो पाई। हालांकि, मामले की गहराई से समीक्षा करते हुए न्यायालय ने जांच प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां पाईं, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया।
न्यायालय द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पुनः परीक्षण करने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर चोट के निशान पाए गए, जो सामान्य आत्मदाह के मामलों से मेल नहीं खाते। इसके अलावा, अन्य परिस्थितिजन्य संकेतों ने भी घटना को संदिग्ध बना दिया, जिससे यह आशंका मजबूत हुई कि मामला आत्महत्या का न होकर कुछ और हो सकता है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह ने पुलिस को नए सिरे से जांच करने और मृतका के पति व परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले से पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है और अब यह देखना होगा कि नई जांच में क्या सच्चाई सामने आती है।


