अलीगढ़ के बन्नादेवी थाना क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नीरू अग्रवाल नाम की महिला के बैंक खाते से साइबर ठगों ने 1.66 लाख रुपये निकाल लिए, जबकि उन्होंने न तो किसी को ओटीपी दिया और न ही पिन साझा किया।
पीड़िता के अनुसार उन्होंने एक वेबसाइट से 399 रुपये का सामान ऑर्डर किया था। लेकिन जब डिलीवरी में गलत सामान मिला तो उन्होंने रिफंड के लिए संपर्क किया। इसके बाद उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताया और रिफंड प्रक्रिया पूरी करने के लिए वीडियो कॉल करने को कहा।
जैसे ही नीरू अग्रवाल ने वीडियो कॉल उठाई, उनके मोबाइल की स्क्रीन अचानक काली हो गई और फोन हैंग हो गया। करीब आधे घंटे बाद जब फोन सामान्य हुआ, तब तक उनके बैंक खाते से 1.66 लाख रुपये गायब हो चुके थे। इस घटना से पीड़िता पूरी तरह हैरान रह गईं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह ठगी “स्क्रीन मिररिंग” या “स्क्रीन शेयरिंग” तकनीक के जरिए की गई। साइबर थाना पुलिस के अनुसार, ठग पहले भरोसा जीतते हैं और फिर एक ऐसा ऐप इंस्टॉल करवाते हैं जिससे उनके पास पीड़ित के मोबाइल की लाइव स्क्रीन पहुंच जाती है।
इस दौरान ठग पीड़ित को किसी न किसी बहाने में उलझाकर रखते हैं और मोबाइल का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते हैं। इसी दौरान वे बैंकिंग ऐप्स और मैसेज बॉक्स तक पहुंचकर ओटीपी और अन्य जरूरी जानकारी हासिल कर लेते हैं, जिससे आसानी से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं।
सीओ द्वितीय धनंजय सिंह के अनुसार मामले की जांच की जा रही है और साइबर अपराधियों की लोकेशन तथा बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल खंगाली जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या वीडियो कॉल के जरिए स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति न दें।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि डिजिटल युग में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन सकती है। पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑफर से सावधान रहने की सलाह दी है।


