स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य और मोबाइल पर सख्ती
लखनऊ
प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो गई है। पहले ही दिन से शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए कई अहम निर्देश लागू किए हैं। इस बार विशेष जोर छात्रों के स्क्रीन टाइम को कम करने और उन्हें अखबार व पुस्तकों की ओर आकर्षित करने पर दिया गया है।
शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार अब विद्यालयों में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान छात्रों से समाचार पत्र की प्रमुख खबरें पढ़वाई जाएंगी। इसके माध्यम से न केवल छात्रों की पढ़ने की आदत विकसित होगी, बल्कि कठिन शब्दों के उच्चारण और उनके अर्थ समझाकर भाषाई क्षमता को भी मजबूत किया जाएगा। साथ ही संपादकीय लेखन, समूह चर्चा और समसामयिक विषयों पर संवाद के जरिए विद्यार्थियों के तार्किक और विश्लेषणात्मक कौशल को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को विज्ञान, पर्यावरण और खेल से जुड़ी खबरों की कतरनों से स्क्रैप बुक तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वहीं सप्ताह में एक दिन समाचार पत्रों में प्रकाशित सुडोकू, वर्ग पहेली और ज्ञानवर्धक क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाएंगी, जिससे बच्चों की बौद्धिक क्षमता में वृद्धि हो सके।
शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों के पुस्तकालयों में हिंदी और अंग्रेजी के समाचार पत्र अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि हर छात्र तक जानकारी पहुंच सके। इसके साथ ही 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक “स्कूल चलो अभियान” भी शुरू किया गया है, जिसके तहत अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने और ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रभात फेरी, रैली और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जनजागरूकता भी फैलाई जाएगी।
वहीं माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों के मोबाइल फोन लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए अब विद्यालयों में बच्चों की रुचि मोबाइल से हटाकर किताबों और अखबारों की ओर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


