लखनऊ
महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों के बीच सियासी बयानबाजी अब व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें नसीहत दी है कि राजनीतिक मजबूरियों में किसी की दिवंगत मां का नाम लेकर टिप्पणी करना अनुचित है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि “नारी के सम्मान में आपसे बस इतना आग्रह है कि ऐसी भाषा का प्रयोग न करें।” उन्होंने आगे कहा कि यदि मेयर अपने घर के बुजुर्गों या बच्चों से इस बयान के बारे में पूछेंगी तो उन्हें खुद समझ आ जाएगा कि यह कितना आपत्तिजनक और द्वेषपूर्ण है। सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि जब महिलाएं ही महिलाओं का अपमान करेंगी, तो समाज में नैतिकता और सम्मान की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
दरअसल, मेयर सुषमा खर्कवाल ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए बयान दिया था कि अखिलेश यादव ने उस महिला का अपमान किया है “जिसकी कोख से जन्म लिया, जिसकी उंगली पकड़कर चले और जिसकी बेटी के चेहरे से थकान मिटती है।” इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई और अब यह विवाद तूल पकड़ता जा रहा है।
इसी बीच अखिलेश यादव ने अपने आगामी कार्यक्रमों को भी गति दी है। वह 25 अप्रैल को गाजियाबाद में किसानों के साथ सीधा संवाद करने जा रहे हैं, जहां ‘किसान क्यों पीड़ित, क्यों परेशान’ विषय पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में किसान संगठनों, कृषि विशेषज्ञों और विभिन्न वर्गों के किसानों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें गन्ना और आलू किसानों की समस्याओं पर विशेष फोकस रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों पर शुरू हुई बहस अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदलती जा रही है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमाता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने बयान पर कायम हैं।


