– एनसीपी विधायक ने सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का लगाया आरोप
– चुनाव आयोग पर दागे सवाल
मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने दावा किया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र में मतदाता सूची से हटाए जाने वाले नामों की संख्या बढ़कर करीब 3 करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने सत्यापन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
रोहित पवार के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। उनके मुताबिक SIR के दौरान करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त नहीं हुए, जबकि लगभग 1.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड अभी जांच के दायरे में हैं। उनका दावा है कि जांच के बाद हटाए जाने वाले नामों की संख्या करीब तीन करोड़ तक पहुंच सकती है।
पवार ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर वास्तविक सत्यापन करने के बजाय कथित रूप से ‘टेबल सर्वे’ किया। उन्होंने पुणे, नासिक और ठाणे में ऐसी शिकायतें सामने आने का दावा किया और कहा कि संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें भी रखी गई हैं।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों का केंद्रीकरण किया जा रहा है। ये पवार के राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
रोहित पवार ने सत्यापन प्रक्रिया के आंकड़ों के आधार पर बड़ी संख्या में नाम हटने की आशंका जताई है। हालांकि, ‘हर पांच में से एक मतदाता हटाया जाएगा’ को वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा घोषित अंतिम आंकड़ा नहीं, बल्कि रोहित पवार का दावा/आकलन मानना चाहिए। SIR में नाम हटाने के अंतिम निर्णय के लिए निर्धारित सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।


