नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष और छात्र-युवाओं की मांगें लगभग एक जैसी हैं और सरकार को सबसे पहले जवाबदेही तय करनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा, “विपक्ष और छात्र-नौजवानों की लगभग मांगें एक हैं। पहले इस्तीफा हो, उसके बाद बातचीत हो और उनकी मांगें मानी जाएं।” उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में 150 से अधिक तथा उत्तर प्रदेश में 20 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार खुद यह स्वीकार कर चुकी है कि पेपर लीक हुए हैं। ऐसे में जिम्मेदारी तय किए बिना केवल चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि “करोड़ों लोगों के साथ सरकार ने धोखा किया है। पहले इस्तीफा हो और उसके बाद चर्चा हो।”
अखिलेश यादव ने संसद परिसर और जंतर-मंतर के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जब राहुल गांधी जी, हम और तमाम सांसद वहां गए तो क्या हमारे कपड़े नहीं पकड़े गए? पुलिस नेताओं के साथ ऐसा व्यवहार कब से करने लगी? आखिर पुलिस को अपमानित करने की ट्रेनिंग कौन दे रहा है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने वालों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है।
सपा प्रमुख ने कहा कि समाजवादी पार्टी कभी भी भूख हड़ताल की राजनीति के पक्ष में नहीं रही है। उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “यह सरकार तो ऐसी है कि इससे उम्मीद करना बबूल के पेड़ पर आम मांगने जैसा है।”
सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो “एक दिन सरकार दिल्ली भी बंद कर देगी, आपको और हमको भी नहीं आने देगी। आखिर इस्तीफा देने में क्या मजबूरी है?”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए। छात्रों, युवाओं और विपक्ष की मांगों पर गंभीरता से विचार करना सरकार की जिम्मेदारी है।


