कन्नौज। जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस समय हलचल मच गई जब सदर ब्लॉक प्रमुख रामू कठेरिया अपनी ही सरकार के प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ तहसील परिसर में धरने पर बैठ गए। एसडीएम सदर वैशाली पर कार्यालय से अपमानित कर बाहर निकालने का आरोप लगाते हुए प्रमुख ने मोर्चा खोल दिया और साफ चेतावनी दी कि एसडीएम के हटने तक उनका धरना जारी रहेगा।ब्लॉक प्रमुख का आरोप है कि वह एक मामले में दोबारा तहसीलदार को जांच सौंपे जाने को लेकर बातचीत करने एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कार्यालय से बाहर जाने को कहा गया। इससे नाराज प्रमुख सीधे तहसील परिसर पहुंचे और पेड़ के नीचे धरना शुरू कर दिया।
धरने पर बैठे प्रमुख ने कहा कि जब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है तो आम जनता के साथ अधिकारियों का रवैया कैसा होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने एसडीएम को तत्काल हटाने की मांग की है और कहा है कि कार्रवाई होने तक वह पीछे नहीं हटेंगे।इस पूरे घटनाक्रम का सबसे आश्चर्यजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील पहलू यह है कि धरना शुरू होने के कई घंटे बाद भी कोई प्रमुख भाजपा नेता या जनप्रतिनिधि उनके समर्थन में नहीं पहुंचा। इसे लेकर खुद रामू कठेरिया ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “मैं दलित समाज से आता हूं, इसलिए मेरा कोई सहयोग नहीं कर रहा है। अगर कोई दूसरा होता तो अब तक नेताओं की लाइन लग जाती।ब्लॉक प्रमुख के इस बयान ने मामले को प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़ाकर सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। विपक्ष को भी सरकार और संगठन पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है। एक तरफ भाजपा सरकार दलित सम्मान और सामाजिक न्याय की बात करती है, वहीं अपनी ही पार्टी से जुड़े एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का यह आरोप स्थानीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
फिलहाल तहसील परिसर में धरना जारी है और प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और संगठन इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या धरने पर बैठे ब्लॉक प्रमुख की मांगों पर कोई कार्रवाई होती है।


